न लोन महंगे हुए न ही सस्ते, 5.25 प्रतिशत पर रही बरकरार
Repo Rate (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया ने इस बार रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव न करने का फैसला लिया है। आरबीआई ने तीन दिन तक चली मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में यह फैसला लिया है। इसी के चलते रेपो रेट अपने पिछले स्तर पर यानि 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी। इससे राहत भरी खबर यह है कि न तो लोन महंगा होगा और न ही पहले से चल रही आपकी लोन की किस्त महंगी होगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज इस संबंध में जानकारी देते हुए देश के सामने स्थिति स्पष्ट की।
इस तरह पड़ता है ग्राहकों पर असर
ज्ञात रहे कि हर तिमाही में आरबीआई अपनी रेपो पॉलिसी की समीक्षा करता है। इसमें जरूरत के हिसाब से रेपो रेट में परिवर्तन किया जाता है। यदि रेपो रेट कम होती है तो ऋण सस्ते होते हैं और यदि रेपो रेट ज्यादा होती है तो ऋण भी महंगा हो जाता है। ज्ञात रहे कि आरबीआई ने दिसंबर में ब्याज दर 0.25% घटाकर 5.25% की थीं। आपको बता दें कि आरबीआई जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। यहां इतना भी बता दें कि बीते साल यानि आरबीआई ने रेपो रेट में चार बार में 1.25% की कटौती की थी।
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। आरबीआई के मुताबिक महंगाई को लेकर स्थिति फिलहाल राहत भरी है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 के लिए रिटेल महंगाई दर 2.1% रहने का अनुमान है। मल्होत्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि महंगाई का दबाव फिलहाल कम है। सिर्फ कीमती धातुओं के मामले में थोड़ा असर दिख रहा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। बाकी ज्यादातर चीजों के लिए कीमतें काबू में है।
अप्रैल में आरबीआई पूरे साल का अनुमान पेश करेगा
आगे की योजना को लेकर आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अप्रैल में आने वाले अगले पॉलिसी स्टेटमेंट में आरबीआई पूरे साल के लिए सीपीआई महंगाई दर का अनुमान पेश करेगा। तब तक नई सीरीज के तहत और अधिक डेटा भी उपलब्ध हो जाएगा।
ये भी पढ़ें : India-US Trade Deal : भारत-अमेरिका ट्रेड डील से छोटे निर्यातकों को नुकसान

