साल 2025 के अंतिम दिन शेयर मार्केट में खूब हुई खरीदारी
Share Market Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारतीय शेयर बाजारों ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में देखी गई पांच दिनों की गिरावट के बाद बुधवार की रिकवरी निवेशकों के लिए राहत भरी रही। साल 2025 में निफ्टी का 10.50% का रिटर्न भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद को दर्शाता है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी सत्र का समापन एक मजबूत बढ़त के साथ किया।
पिछले कुछ दिनों से जारी सुस्ती और गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए, बुधवार को बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1 प्रतिशत तक चढ़कर बंद हुए। इस तेजी का मुख्य श्रेय घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की निरंतर खरीदारी और साल के अंत में हुई ‘शॉर्ट कवरिंग’ को जाता है। अब निवेशकों की नजर 2026 की पहली तिमाही के कॉपोर्रेट नतीजों और आगामी केंद्रीय बजट के संकेतों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
इस तरह रहा दिनभर में कारोबार
बुधवार को उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद, बीएसई (बीएसई) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 545.52 अंक या 0.64% की बढ़त के साथ 85,220.60 पर बंद हुआ। दिन के दौरान, एक समय सेंसेक्स ने 762.09 अंकों की छलांग लगाते हुए 85,437.17 के स्तर को भी छुआ था। वहीं, एनएसई (एनएसई) का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी 190.75 अंक या 0.74% चढ़कर 26,129.60 के स्तर पर बंद हुआ। उल्लेखनीय है कि यह बढ़त लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद दर्ज की गई है।
ये शेयर बने गेनर और लूजर
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, टाइटन और ट्रेंट आज के सबसे बड़े ‘टॉप गेनर्स’ रहे। इन शेयरों में खरीदारी ने बाजार को निचले स्तरों से उबारने में मदद की। दूसरी ओर, आईटी और फार्मा सेक्टर के कुछ दिग्गजों में दबाव देखा गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस और सन फार्मा पिछड़ने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल थे।
बुधवार की तेजी पर जानकारों का कहना है कि बाजार का सेंटिमेंट स्पष्ट रूप से तेजी की ओर मुड़ गया है, हालांकि प्रमुख रेजिस्टेंस लेवल अभी भी बरकरार हैं। साल के अंत में रिस्क लेने की क्षमता में सुधार देखा गया, जो मुख्य रूप से शॉर्ट कवरिंग और चुनिंदा शेयरों में खरीदारी से प्रेरित था। दूसरी तरफ विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख अभी भी सावधानी भरा है। मंगलवार को 3,844.02 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को सहारा देते हुए 6,159.81 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी की।

