800 डॉलर तक बिना शुल्क माल भेजने की सुविधा होगी खत्म
India-US Trade Deal (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत और अमेरिका में व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है। अमेरिकी राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात का ऐलान कर चुके हैं कि दोनों देशों में व्यापार समझौते पर सहमति बन चुकी है। इसके साथ ही ट्रंप ने भारत पर लगाया गया टैरिफ भी कम करके 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। ट्रंप के इस बयान के बाद भारतीय निर्यातकों में खुशी की लहर है।
क्योंकि वर्तमान में अमेरिका भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार है। वहीं इस व्यापार समझौते के बाद होने वाले बदलावों में छोटे निर्यातकों के लिए चिंता बढ़ा दी है। इसका कारण यह है कि आने वाले समय में अमेरिका में 800 डॉलर तक बिना शुल्क माल भेजने की सुविधा खत्म हो जाएगी।
कारोबारियों को सरकार से हल निकालने की उम्मीद
कारोबारी और निर्यातक चाहते हैं कि भारत सरकार इस मुद्दे पर भी अमेरिका से बात करे। असल में पहले 800 डॉलर मूल्य तक की अमेरिका भेजी जाने वाली खेपों पर कोई शुल्क नहीं लगता था। लेकिन जब पिछले साल टैरिफ वार शुरू हुआ तो चरणबद्ध तरीके से भारतीय सामान पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगा दिया। इसके साथ ही, गत वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका के टैरिफ एक्ट, 1930 की धारा 321 के तहत अमेरिका ने यह सुविधा खत्म कर दी है। इस सुविधा से छोटे निर्यातकों, कारीगरों और सीमा पार ई-कॉमर्स से जुड़े उद्यमों को काफी मदद मिलती थी। इस छूट के समाप्त होने से कई चुनौतियां बढ़ी हैं।
रोजगार और श्रमिकों की आय पर संकट
लोक नीति विशेषज्ञ एवं एसोचैम यूपी के को-चेयरमैन हसन याकूब का कहना है कि ऐसे छोटे निर्यातक उद्यम बड़ी संख्या में कारीगरों और कौशल आधारित श्रमिकों को रोजगार देते हैं। शुल्क बढ़ने से आॅर्डरों में आई कमी का सीधा असर रोजगार और आय पर पड़ता है। धारा 321 के अंतर्गत मिलने वाली यह सुविधा कस्टम प्रक्रिया को भी तेज और सरल बनाती थी, जिससे निर्यातक पूरी तरह अनुपालन के साथ व्यापार कर सकते थे। इस सुविधा के अभाव में भारतीय निर्यातक उन देशों की तुलना में पिछड़ जाते हैं, जिन्हें अब भी ऐसी छूट उपलब्ध है।
हस्तशिल्प उद्यमियों को ज्यादा दिक्कत
हस्तशिल्प और श्रम आधारित उत्पाद बनाने वाले छोटे उद्यम अब अधिक लागत के कारण अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। पहले मिलने वाली यह सीमा आॅनलाइन अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी सुगम बनाती थी। अमेरिकी ग्राहकों तक सीधे भारतीय उत्पाद पहुंचाना था और अतिरिक्त शुल्क या जटिल दस्तावेजी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती थी।
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