कहा, हमने 2030 तक एक लाख मेगावाट तक सौर ऊर्जा का लक्ष्य रखा
Business News Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सौर ऊर्जा वर्तमान में बिजली का सबसे सस्ता व टिकाऊ विकल्प है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के लिए एक बार पूंजी निवेश के बाद कोयला, गैस या डीजल जैसे ईंधन पर कोई खर्च नहीं होता। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन है, जो प्रदूषण कम करने के साथ टिकाऊ विकास का मजबूत विकल्प प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि 1,000 से 2,000 मेगावाट की विशाल परियोजनाएं तेजी से उभर रही हैं और नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय जरूरत के रूप में प्राथमिकता मिली है। गोयल ने कहा कि शुरुआत में जब हम 2014 में सत्ता में आए तो 2030 तक 20,000 मेगावाट का लक्ष्य था, जिसे हमपे 2014 के बाद बढ़ाकर 100 गीगावाट (1 लाख मेगावाट) कर दिया गया। यह तब तय किया गया जब बिजली की कीमतें 5 से 6.5 रुपये प्रति यूनिट थीं।
सौर ऊर्जा उत्पादन हमारी दीर्घकालिक सोच का परिणाम
भारत का सौर ऊर्जा की ओर रणनीतिक रुख दीर्घकालिक सोच का परिणाम है। इसका उद्देश्य लागत घटाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। वे वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन के तहत सोलर डिविडेंस कार्यक्रम में बोल रहे थे। गोयल ने बताया कि बाजार प्रतिस्पर्धा और तकनीकी स्केलिंग ने सौर ऊर्जा को एक महंगे विकल्प से किफायती ऊर्जा स्रोत में बदला। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब सौर ऊर्जा को लेकर तीखी आलोचनाएं थीं और बिजली की कीमत लगभग 16 रुपये प्रति यूनिट थी। बावजूद इसके, तत्कालीन मुख्यमंत्री की स्पष्ट सोच थी कि जैसे-जैसे पैमाना बढ़ेगा और तकनीक सुधरेगी, लागत स्वाभाविक रूप से घटेगी।
2014 के बाद किए गए कई अहम बदलाव
मंत्री ने बताया कि 2014 के अंत में फीड-इन टैरिफ से हटकर रिवर्स आॅक्शन (प्रतिस्पर्धी बोली) मॉडल अपनाना निर्णायक कदम रहा। इससे डेवलपर्स के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी और पहली ही नीलामी में दरें गिरकर करीब 2.5 रुपये प्रति यूनिट पर आ गईं, जिससे बड़े पैमाने पर यूटिलिटी-स्केल सौर परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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