नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने हाल ही में संसद के बजट सत्र में एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने निजी अस्पतालों में हो रही मनमानी और इलाज के नाम पर आम लोगों की हो रही लूट पर कड़ी बात की।
स्वाति मालीवाल ने कहा कि आजकल प्राइवेट अस्पताल इलाज करने के बजाय कमाई का धंधा बन गए हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई मरीज इमरजेंसी में अस्पताल पहुंचता है, तो डॉक्टर सबसे पहले मरीज की नब्ज देखने के बजाय पूछते हैं – “मेडिक्लेम है या नहीं?” या “पैसे कितने हैं?” अगर बीमा है तो बिल बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बना दिया जाता है।
उन्होंने कई उदाहरण दिए:
- निजी अस्पतालों के कमरे 5-सितारा होटलों से भी महंगे हो गए हैं। डीलक्स, प्रीमियम या सूट रूम के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाते हैं।
- छोटी-छोटी चीजों जैसे थर्मामीटर, दस्ताने, मास्क या सैनिटाइजर पर भी बहुत ज्यादा चार्ज लगाया जाता है।
- मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाइयां लिखी जाती हैं और जरूरत से ज्यादा टेस्ट करवाए जाते हैं।
- इससे मध्यम वर्ग के परिवारों को घर-गहने गिरवी रखने या कर्ज लेने की नौबत आ जाती है।
स्वाति मालीवाल ने सरकार से कई मांगें कीं:
- क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, ताकि अस्पतालों के चार्जेस और बिलिंग पर नियंत्रण हो सके।
- इमरजेंसी में पहले इलाज, बाद में बिल की व्यवस्था कानून बनाकर लागू हो।
- अस्पतालों में पारदर्शी और निष्पक्ष बिलिंग सिस्टम हो।
- स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की मनमानी बढ़ोतरी और क्लेम रिजेक्ट करने पर सख्त निगरानी हो।
उन्होंने कहा कि मरीज इंसान हैं, कमाई का साधन नहीं। निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच कथित गठजोड़ से आम आदमी बहुत परेशान है। यह मुद्दा सिर्फ एक पार्टी या सरकार का नहीं, बल्कि हर उस परिवार की पीड़ा है जो इलाज के चक्कर में आर्थिक रूप से टूट जाता है।
स्वाति मालीवाल की यह आवाज संसद में गूंजी और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। उम्मीद है कि सरकार इस पर जल्दी कोई सख्त कदम उठाएगी ताकि स्वास्थ्य सेवाएं गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सुलभ और किफायती बन सकें।
