अमेरिका-ईरान के बीच जिनेवा में हुई बातचीत, दोनों तरफ से बातचीत का ब्यौरा नहीं किया गया जारी
US-Iran Conflict (द भारत ख़बर), जिनेवा : पश्चिम एशिया में अमेरिका द्वारा सैनिकों का जमावड़ा लगातार बढ़ाने के कारण युद्ध का खतरा लगातार बना हुआ है। हालांकि बीते दिन अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच जिनेवा में अहम वार्ता हुई। लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही की इस वार्ता के बाद दोनों पक्षों की तरफ से कोई बयान साामने नहीं आया जिससे यह अंदाजा लगाया गया कि बातचीत में कोई खास प्रगति या सहमति नहीं बन पाई।
बातचीत पर टिकी थी पूरी दुनिया की नजर
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हो रही इस बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर टिकीं थी, क्योंकि इसी के साथ पश्चिम एशिया में सैन्य हलचल भी तेज हो गई है। वार्ता का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करना और संभावित युद्ध को टालना बताया गया है, जबकि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपने विमान और युद्धपोतों का बड़ा बेड़ा तैनात कर रहा है। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी, जो वार्ता के मध्यस्थ हैं, ने कहा कि वार्ता पूरी हो गई है और जल्द ही फिर शुरू होगी। उन्होंने ट्वीट किया कि बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, हालांकि विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। तकनीकी स्तर की वार्ता अगले सप्ताह वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के मुख्यालय में होगी।
ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को दी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा रवाना होने से पहले चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर होंगे। उन्होंने कहा यह किसी के लिए जीत की स्थिति नहीं होगी। पूरा क्षेत्र एक विनाशकारी युद्ध की चपेट में आ सकता है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस्राइल को भी निशाना बना सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
पिछले वर्ष कई दौर की वार्ता उस समय पटरी से उतर गई थी जब इस्राइल ने ईरान पर 12 दिन तक हमले किए और अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर भारी बमबारी की। हालांकि नुकसान की पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा, लेकिन वह उस स्तर तक पहुंचने की कोशिश में है जहां से परमाणु हथियार बनाना संभव हो सके।
ये भी पढ़ें : Pakistan-Afghanistan Conflict : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति

