जीडीपी वृद्धि दर में एक फीसदी कमी संभव, महंगाई दर बढ़ने की आशंका : सर्वे
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी तनाव को एक माह से ज्यादा समय बीत चुका है। इससे जहां खाड़ी देश युद्ध की स्थिति से जूझ रहे हैं। वहीं तेल व गैस आपूर्ति भी बाधित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द यह युद्ध समाप्त न हुआ तो इसका असर पूरे विश्व की आर्थिकता पर पड़ा संभव है। विशेषकर विकासशील देशों में स्थिति बिगड़ सकती है। पश्चिम एशिया तनाव का असर भारत पर भी पड़ने की पूरी संभावना है। हालांकि भारत इस स्थिति से निपटने के लिए लगातार विकल्प तलाश रहा है लेकिन फिर भी इसका असर पड़ना लाजमी है।
जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के आगामी वित्त वर्ष तक जारी रहने पर भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर में करीब एक फीसदी तक कमी आ सकती है, जबकि खुदरा महंगाई में लगभग 1.5 फीसदी बढ़त हो सकती है। ईवाई इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट के अनुसार कपड़ा, पेंट, रसायन, उर्वरक, सीमेंट व टायर जैसे कई क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में रोजगार या आय में किसी भी कमी से मांग पर और दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 फीसदी आयात करता है, इसलिए वह ऐसे बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील है।
सर्वे के अनुसार इतनी रह सकती है जीडीपी दर
ईवाई ने फरवरी की अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि 6.8 से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। इससे पहले आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन ने अनुमान लगाया था, भारत की जीडीपी वृद्धि घटकर 6.1 फीसदी रह सकती है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि खुदरा महंगाई लगभग 1.5 फीसदी बढ़कर अपने मूल अनुमान सात फीसदी से ऊपर जा सकती है। इसकी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति का संकट। युद्ध ने कच्चे तेल और ऊर्जा बाजारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इससे तेल की घरेलू आपूर्ति और भंडारण पर असर पड़ा है। संघर्ष जल्दी समाप्त हो जाने पर भी देश में स्थिति सामान्य होने में कुछ महीनों का समय लग सकता है।
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