Editorial Aaj Samaaj | राजीव रंजन तिवारी | कोस कोस पर बानी बदले, तीन कोस पर पानी। यह एक हिंदी कहावत है जो देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि हर कुछ किलोमीटर पर पानी का स्वाद और भोजन बदल जाता है। हर थोड़े-थोड़े फासले पर लोगों की बोली (भाषा) भी बदल जाती है, जिससे पता चलता है कि भारत में कितनी क्षेत्रीय भिन्नताएं हैं, जहां हर क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है। ठीक इसी तरह देश का प्रमुख पूर्वोत्तर राज्य पश्चिम बंगाल की माटी की महक और मिजाज का एक अलग ही मनोविज्ञान है। यदि बात सियासत की करें तो वह कुछ ज्यादा ही जटिल है। यहां के लोग, यहां की भाषा, यहां के लोगों के सोचने का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में थोड़ा भिन्न है। यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसकी रणनीति हर स्तर पर तैयार की जा रही है। इसके लिए कोई भी दल किसी भी तरह का कसर छोड़ना नहीं चाहता। चाहे कुछ भी हो जाए, बंगाल जीतना है। खासकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच गजब की होड़ देखने को मिल रही है। ताजा प्रकरण में वहां ईडी की छापेमारी ने हलचल मचा दी है। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोग इसे सियासी रंग देने की कोशिश में जुटे हुए हैं। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सियासी गर्मी बढ़ी हुई है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव अब तक के सबसे तीखे मोड़ पर पहुंच गया है। आठ जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की चुनावी रणनीति संभालने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और कथित तौर पर जांच एजेंसी के सामने से अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत अपने कब्जे में ले लिए। यह पूरा घटनाक्रम कथित कोयला घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जुड़ा है। कलकत्ता हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए ईडी के वकील ने गंभीर आरोप लगाए। एजेंसी ने अपनी याचिका और बयान में कहा कि जब वे कोलकाता और दिल्ली में 10 स्थानों (जिनमें आईपैक का सॉल्ट लेक स्थित दफ्तर और प्रतीक जैन का लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास शामिल है) पर सबूतों के आधार पर तलाशी ले रहे थे, तभी मुख्यमंत्री ने बाधा उत्पन्न की।
ईडी ने अपने बयान में कहा कि छापेमारी की प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पेशेवर तरीके से चल रही थी। तभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी पुलिस बल के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं। उन्होंने वहां से महत्वपूर्ण सबूत, जिनमें फिजिकल डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल थे, अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद उनका काफिला आईपैक के ऑफिस पहुंचा, जहां सीएम, उनके सहयोगियों और राज्य पुलिस ने जबरन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को वहां से हटा दिया। एजेंसी का दावा है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों पर आधारित थी। रेड की खबर मिलते ही ममता बनर्जी पहले प्रतीक जैन के घर पहुंचीं और फिर सॉल्ट लेक स्थित आईपैक के दफ्तर पहुंचकर धरने पर बैठ गईं। ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर से एक हरी फाइल लेकर निकलती देखी गईं। बाद में आईपैक दफ्तर में उन्होंने करीब 45 मिनट बिताए। मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मैंने अपने जीवन में ऐसे डकैत नहीं देखे। अमित शाह, अगर आप पश्चिम बंगाल जीतना चाहते हैं तो राजनीतिक रूप से लड़ें। यह क्या तरीका है? ईडी हमारी पार्टी की उम्मीदवार सूची, चुनावी रणनीति और आंतरिक डेटा चोरी करने आई थी। क्या यह अमित शाह का काम है? जो गृह मंत्री देश की सुरक्षा नहीं कर सकते, वे मेरी पार्टी के दस्तावेज चुरा रहे हैं।
ममता ने चुनौती देते हुए कहा कि मिस्टर अमित शाह, अगर आप ऐसे ही चलते रहे तो बंगाल में आपको जीरो सीटें मिलेंगी। प्रधानमंत्री जी, कृपया अपने गृह मंत्री को नियंत्रित करें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ऐप के जरिए बंगाल के 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है और ईडी अब आईपैक के डेटा के जरिए चुनावों को प्रभावित करना चाहती है। मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब 9 घंटे की छापेमारी के बाद प्रतीक जैन के परिवार ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। प्रतीक जैन की पत्नी ने शेक्सपियर सारणी पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है कि रेड के दौरान ईडी अधिकारियों ने उनके घर से जरूरी दस्तावेज चोरी किए हैं। कोलकाता पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि जब एक मुख्यमंत्री खुद जाकर जांच एजेंसी के सामने से दस्तावेज हटाती है, तो वह खुद को संविधान और कानून से ऊपर रख रही हैं।वहीं, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने ममता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
दूसरी ओर, माकपा (सीपीएम) और कांग्रेस ने इसे नूराकुश्ती करार दिया है। माकपा नेता मोहम्मद सलीम और कांग्रेस नेता शुभंकर सरकार ने सवाल उठाया कि एक प्राइवेट कंपनी (आईपैक) पर रेड के दौरान मुख्यमंत्री वहां क्यों गईं? उन्होंने इसे भाजपा और तृणमूल के बीच का फिक्स ड्रामा बताया। पूर्वी कोलकाता की एक इमारत की 11वीं मंजिल पर 100 से ज्यादा कर्मचारी नीले-सफेद डेस्क पर लैपटॉप के साथ बैठे थे और दो बड़ी टीवी स्क्रीन पर खबरें चल रही थीं। यह जगह है आईपैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) का दफ्तर, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के शस्त्रागार का सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि यह एजेंसी कैसे बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के लिए पर्दे के पीछे काम करती है। आईपैक वह सब करती है जो ममता बनर्जी पहले खुद करती थीं। अभियान की थीम तय करना, उम्मीदवारों की जांच करना और कई बार पार्टी के लिए डर्टी वर्क (कठिन या अप्रिय काम) संभालना। भाजपा का एक वर्ग भी मानता है कि आईपैक अपने काम में माहिर है। ममता सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार, तृणमूल आवेग (भावनाओं) पर चलती है, लेकिन आईपैक ने इसमें एक ढांचा और सिस्टम ला दिया है।
प्रशांत किशोर और आईपैक की एंट्री 2019 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल के खराब प्रदर्शन के बाद हुई थी। 2021 के विधानसभा चुनावों में आईपैक ने दुआरे सरकार और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं के जरिए ममता की एक नई छवि पेश की, जिसने भाजपा के नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया। अब प्रशांत किशोर के जाने के बाद, संगठन का नेतृत्व तीन निदेशक कर रहे हैं, जिनमें प्रतीक जैन, विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह शामिल हैं। प्रतीक जैन (35) तृणमूल और एजेंसी के बीच की मुख्य कड़ी हैं। सूत्रों के मुताबिक, आईपैक की कार्यप्रणाली बेहद डेटा-आधारित है। वे विधायकों को प्रश्नावली भेजते हैं, जमीनी स्तर पर फीडबैक लेते हैं और पार्टी नेतृत्व को समाधान सुझाते हैं। हालांकि, यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा है। कई वरिष्ठ तृणमूल नेताओं ने उम्मीदवारों के चयन में एजेंसी के दखल पर नाराजगी भी जताई है। लेकिन, 2026 के विधानसभा चुनाव और मतदाता सूची संशोधन जैसे मुद्दों को लेकर आईपैक एक बार फिर ममता बनर्जी के लिए नैरेटिव सेट करने में जुटी है। क्योंकि बंगाल में ममता से बेहतर यह कोई नहीं जानता कि नैरेटिव ही चुनाव जिताते हैं।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल की स्थिति लगातार बदलती जा रही है। विधानसभा चुनाव में किसकी जीत होगी, इस बारे में अभी टिप्पणी नहीं की जा सकती। लेकिन परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं अथवा बदलने की कोशिश की जा रही है। इसे समझना हर किसी के लिए जरूरी है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि भाजपा इस बार हर हाल में पश्चिम बंगाल को जीतने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए वह साम दाम दंड भेद सब अपनाने को आतुर है। पश्चिम बंगाल में आईपैक के खिलाफ ईडी की छापेमारी को भी विधानसभा चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है। जबकि ईडी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सबकुछ विभागीय प्रक्रिया के तहत हो रहा है। इसे राजनीति से जोड़कर देखना ठीक नहीं है। खैर, फिलहाल कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल देखने मिल रही है। आगे क्या होगा, यह किसी को पता नहीं। (लेखक द भारत ख़बर के संपादक हैं।)
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