सुप्रीम कोर्ट में सीएम ममता बनर्जी ने पेश की दलीलें
West Bengal SIR List Controversy, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। खुद सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर दलीले पेश की। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर है। जो काम 2 साल में होना था, उसे 3 महीने में करवाया जा रहा है।
सुनवाई के बाद सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली लोग चुनावी सूची में बने रहने चाहिए। ममता की याचिका पर बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं।
ममता ने दी ये दलीलें
- कोर्ट में ममता ने कहा, 24 साल बाद इसे 3 महीने में पूरा करने की जल्दबाजी क्यों है। 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। एसआईआर की प्रताड़ना के चलते बीएलओ की जान जा रही है। बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम और नॉर्थ ईस्ट में ऐसा क्यों नहीं हो रहा।
- एसआईआर प्रक्रिया वोटर्स को शामिल करने नहीं बल्कि हटाने के लिए हो रही है। अब तक 58 लाख लोगों के नाम हटाए जा चुके हैं। भाजपा ने माइक्रो आॅब्जर्वर नियुक्ति किए, जो बीएलओ अधिकारों को दरकिनार करते हुए नाम हटा रहे हैं। नाम मिस मैच पर दिए गए नोटिस वापस लिए जाएं।
- बेटी शादी के बाद ससुराल जाती है, वह पति का टाइटल इस्तेमाल कर रही है, यह भी मिसमैच है। कुछ बेटियां जो ससुराल चली गईं, उनके नाम भी डिलीट कर दिए गए।
चुनाव आयोग का जवाब, राज्य सहयोग नहीं कर रहा
इलेक्शन कमीशन ने कहा, राज्य सरकार से बार-बार मांग करने के बाद एसआईआर के काम के लिए पर्याप्त ग्रुप बी अधिकारी नहीं दिए गए। इस कारण माइक्रो आॅब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। सभी नोटिस में कारण होते हैं। जिनके नाम हटे उन्हें अधिकृत एजेंटों को भी लाने की अनुमति दी गई थी। हमने राज्य सरकार को कई पत्र लिखे हैं कि हमें क्लास 2 अधिकारी दें ताकि ईआरओ को नियुक्त किया जा सके। उन्होंने उस रैंक के लगभग 80 अधिकारी दिए हैं, बाकी निचले रैंक के। इसलिए हमें माइक्रो आॅब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। गलती उनकी है। माइक्रो आॅब्जर्वर सही तरीके से नियुक्त किए गए हैं। राज्य सहयोग नहीं कर रहा है, तो कोई दूसरा आॅप्शन नहीं है। समय की कोई समस्या नहीं है।
नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी होने पर चुनाव आयोग नोटिस जारी न करे
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, सभी नोटिस वापस लेना अव्यावहारिक है। नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी होने पर चुनाव आयोग नोटिस जारी न करे। चुनाव आयोग अपने अधिकारियों को भी निर्देश दे कि वे संवेदनशील रहें। अगर राज्य सरकार ऐसे लोगों की टीम देती है, जो बांग्ला और स्थानीय बोलियां जानते हों, और वे जांच करके चुनाव आयोग को बताएं कि स्थानीय बोली के कारण गलती है, तो इससे मदद मिलेगी।

