कहा, विदेशी छात्रों के भारत आने के मुकाबले भारतीय छात्र बड़ी संख्या में विदेश जा रहे
Business News Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : उच्च शिक्षा के लिए विदेशों की तरफ भारतीय छात्रों के रुख के विपरीत विदेशी छात्रों का भारत की तरफ रूझान बहुत मामूली है। यह आंकड़े हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आए हैं। नीति आयोग ने इसपर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारत सरकार को अपनी नीति में बदलाव करने की सलाह दी है। नीति आयोग ने भारत की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए पांच मंत्रालयों की अंतर-मंत्रालयी टास्क फोर्स गठित करने की सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि भारत में अलग डिग्री प्रणाली है। इसलिए एक एकीकृत अंतरराष्ट्रीय डिग्री समतुल्यता प्रणाली बनाने की भी आवश्यकता जताई है।
रिपोर्ट में यह तथ्य आए सामने
देश से पढ़ाई के लिए विदेश जाने और दूसरे देशों से पढ़ाई के लिए भारत आने वाले छात्रों के बीच भारी अंतर है। नीति आयोग ने भारत में उच्च शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण : संभावनाएं, क्षमता और नीतिगत सिफारिशें पर आधारित अध्ययन रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में जहां भारत में पढ़ने के लिए 50 हजार विदेशी छात्र आए, वहीं 2024 में 13 लाख भारतीय छात्रों ने विदेशी विश्वविद्यालयों में दाखिला लिया। भारत आने वाले 50 हजार छात्रों में से 30 फीसदी नेपाल के छात्र थे। इसका अर्थ है कि 28 भारतीय छात्रों के विदेश में उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए जाने के मुकाबले महज एक छात्र विदेश से भारत आया है।
देश में इस समय 54 केंद्रीय विश्वविद्यालय
चक्रीय वार्षिक विकास दर (सीएजीआर ) पर आधारित वैश्विक मानक निर्धारण दृष्टिकोण ने 2030 में भारत में विदेशी छात्रों की संख्या 85 हजार से बढ़कर 1.3 लाख होने की उम्मीद जताी है। वहीं, वर्ष 2035 में 1.23 लाख से 2.44 लाख और विकसित भारत 2047 तक यह आंकड़ा 10 लाख तक रहने की उम्मीद व्यक्त की है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश में 54 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं। इसलिए 54 देशों के आॅफिस इन कैंपस में खोलने के लिए समझौते होने चाहिए। ताकि जरूरतों के आधार पर काम हो।
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