आर्थिक मदद में दो अरब डॉलर की कटौती करने का ऐलान
Donald Trump (द भारत ख़बर), न्यूयॉर्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से दुनिया को चौकाते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ को दी जाने वाली वित्तीय मदद में कटौती करने की घोषणा कर दी है। ट्रंप ने उस फंडिंग में कमी करने का ऐलान किया है जिससे यूएन पूरे विश्व में जरुरतमंद देशों में मानवता की भलाई के लिए कार्य करने में प्रयोग करता है। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों को धमकी दी है कि या तो वे नई हकीकत को जान लें या फिर मिटने के लिए तैयार रहें। अमेरिका द्वारी दी जा रही दो अरब डॉलर की आर्थिक मदद पूर्व में दी जाने वाली मदद का छोटा सा हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र के डेटा के अनुसार, हाल के वर्षों में अमेरिका द्वारा यूएन को सालाना करीब 17 अरब डॉलर की आर्थिक मदद दी जाती थी। इनमें से 8-10 अरब डॉलर तो अमेरिका द्वारा स्वैच्छिक योगदान के तौर पर दिए जाते थे और साथ ही अरबों डॉलर संयुक्त राष्ट्र सदस्यता की फीस के तौर पर दिए जाते थे। साथ ही अन्य पश्चिमी देशों ने भी संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग में कटौती की है। इसका कटौती का असर संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न मानवीय योजनाओं पर पड़ा है, जो फंडिंग से वित्तपोषित होती हैं।
अब अमेरिका ही वास्तविक संयुक्त राष्ट्र
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की भूमिका पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा है कि अमेरिका अब ‘वास्तविक संयुक्त राष्ट्र’ बन गया है, क्योंकि वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में यूएन बहुत कम मदद कर पाया है। ट्रंप ने यह बयान ऐसे समय दिया, जब उन्होंने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रही लड़ाई के रुकने की घोषणा की। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हालिया संघर्ष अब रुक जाएगा और दोनों देश पहले से मौजूद संधि के अनुसार शांति से रहने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने दोनों देशों के नेताओं की सराहना करते हुए इसे ‘तेज और निष्पक्ष फैसला’ बताया।
मानवता की भलाई के कार्यक्रम होंगे प्रभावित
अमेरिका के यूएन की फंडिंग में कटौती करने के फैसले की ओलचना करने वाले लोगों का कहना है कि इससे लाखों लोग भुखमरी के शिकार हो सकते हैं और लाखों लोगों को विस्थापन और बीमारियां झेलनी पड़ सकती है। साथ ही इससे अमेरिका की सॉफ्ट पावर को भी भारी नुकसान होगा। अमेरिका द्वारा फंडिंग रोकने के फैसले से पहले ही संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां कम खर्च कर पा रही हैं और साथ ही उन्हें लोगों की छंटनी करनी पड़ी है।
संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग में सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका से ही आता है, ऐसे में फंडिंग में कटौती का असर संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए जाने वाले मानवीय कार्यों पर पड़ेगा। इनमें अफगानिस्तान में भुखमरी के शिकार हो रहे लोगों पर भी असर पड़ेगा जिनकी मदद संयुक्त राष्टÑ ऐसी ही राशि से कर रहा है। ज्ञात रहे कि पिछले दिनों आई रिपोर्ट में यह कहा गया था कि अफगानिस्तान में करीब 2.39 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हैं जिनमें से 39 लाख लोगों के लिए यूएन प्रबंध कर रहा है।
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