लिंक्डइन पर पोस्ट किए गए लेख में पीएम मोदी ने 2025 को भारत की सुधार यात्रा का वर्ष बताया
PM Modi on Indian Economy (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : साल 2025 जहां पूरी दुनिया के लिए एक अलग चुनौती भरा साल रहा वहीं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह सुधारों भरा यादगार समय रहा। लिंक्डइन पर पोस्ट किए गए एक लेख में प्रधानमंत्री ने 2025 को भारत की सुधार यात्रा का एक ऐतिहासिक वर्ष बताया। पिछले 11 वर्षों में हुई प्रगति पर निर्णायक रूप से आधारित है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत में हुए अगली पीढ़ी के सुधारों की सराहना करती है। इन कदमों का मकसद देश की विकास क्षमता को बढ़ाना है।
भारत सुधार के दौर में है
इस लेख में पीएम ने कहा कि मैं कई लोगों से कहता रहा हूं कि भारत सुधार के दौर में है। इस सुधार का प्राथमिक इंजन भारत की जनसंख्या, हमारी युवा पीढ़ी और हमारे लोगों का अदम्य साहस है। उन्होंने आगे कहा कि 2025 को भारत के लिए एक ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जाएगा जब उसने पिछले 11 वर्षों में हासिल की गई उपलब्धियों के आधार पर निरंतर राष्ट्रीय मिशन के रूप में सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया। हमने संस्थानों का आधुनिकीकरण किया, शासन को सरल बनाया और दीर्घकालिक, समावेशी विकास की नींव को मजबूत किया।
अर्थशास्त्रियों से की विशेष प्रयासों की अपील
इसके साथ ही पीएम मोदी ने मंगलवार को देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों से कहा कि विकसित भारत का संकल्प अब केवल सरकारी नीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की एक ‘जन-आकांक्षा’ बन चुका है। वे देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्हें संबोधित कर रहे थे। इस बैठक का उद्देश्य आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले आयोजित इस विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना रहा। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने साफ किया कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अब विभिन्न क्षेत्रों में ‘मिशन मोड’ में सुधार जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए मुख्य केंद्र बनना होगा
प्रधानमंत्री ने भारत को वैश्विक कार्यबल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अर्थशास्त्रियों ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक सुझाव दिए। घरेलू बचत बढ़ाने और बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर विमर्श हुआ।प्रधानमंत्री मोदी ने विशेषज्ञों से अपील की है कि भारत न केवल अपनी आंतरिक चुनौतियों का सामना करे, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक नेतृत्वकारी भूमिका निभा सके।
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