गिरते रुपए को संभालने के साथ ही विकास दर बनाए रखना चुनौती
GDP Growth in 2026 (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : साल 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शानदार रहा। इस साल में भारतीय अर्थव्यवस्था ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जबरदस्त विकास दर हासिल करते हुए पूरी दुनिया को चकित किया। हालांकि अब साल 2025 बीत चुका है और भारतीय अर्थव्यवस्था की वह उपलब्धि भी बीते समय की बात हो चुकी है। अब साल 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। यह इसलिए भी जरूरी है कि हमने 2025 में जापान को पछाड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल किया है।
अब विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए हमें जर्मनी को पछाड़ना होगा। जिसके लिए इस साल पूरी तैयारी करनी होगी। वर्तमान में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत एक ऐसे ‘गोल्डिलॉक्स’ चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां मजबूत वृद्धि दर और नरम महंगाई का दुर्लभ मेल दिख सकता है। हालांकि, घरेलू मोर्चे पर मजबूती के बावजूद वैश्विक व्यापार में तनाव और मुद्रा बाजार की अस्थिरता 2026 में नीति निमार्ताओं के लिए मुख्य चुनौती बनी रहेगी।
रुपए में कमजोरी चिंता का विषय
आर्थिक मजबूती के बीच, भारतीय रुपया 2026 में भी दबाव में रहने के संकेत दे रहा है। वर्ष 2025 में रुपये ने डॉलर के मुकाबले 91 का ऐतिहासिक निचला स्तर देखा। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा घोषित पारस्परिक टैरिफ के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर निकासी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा मुद्रा संकट मुख्य रूप से गिरते पूंजी प्रवाह और अस्थिर पोर्टफोलियो प्रवाह के कारण है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता निर्यात को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन यह रुपये की गिरावट रोकने के लिए ‘रामबाण’ साबित नहीं होगा। अल्पकालिक अवधि में रुपया 92-93 के स्तर तक जा सकता है, लेकिन अप्रैल 2026 के बाद वैश्विक पूंजी के पुनर्गठन और डॉलर की संभावित कमजोरी से रुपया 83-84 के स्तर तक मजबूत हो सकता है।
2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर होगी
2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, इस आंकड़े ने भारत को जापान से आगे निकालकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत अब अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
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