कहा, द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में मिली भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों को मान्यता
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत ने पिछले कुछ समय में भारत ने अपने व्यापारिक रिश्तों को तेजी के साथ मजबूत और विकसित किया है। इसके लिए पिछले कुछ माह में भारत ने उन द्विपक्षीय समझौतों को पूरा किया है जिनपर पिछले कई साल से वार्ता चल रही थी या फिर बीच में ही अटकी हुई थी। इन्हीं द्विपक्षीय समझौतों के चलते आने वाले समय में भारतीय उत्पादों के लिए विश्व के कई नए बाजार खुलने जा रहे हैं। इन समझौतों में जहां अन्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा वहीं भारत के आयुष व हर्बल उत्पादों के निर्यात में भी तेजी आएगी।
न्यूजीलैंड और ओमान ने दी मान्यता
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली आयुष को ओमान और न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में औपचारिक मान्यता मिल गई है। पिछले साल दिसंबर में अंतिम रूप दिए गए दोनों समझौतों में स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं और पारंपरिक चिकित्सा पर समर्पित परिशिष्ट शामिल हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुष) को भारत-ओमान सीईपीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए सहित द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में औपचारिक मान्यता भी मिल चुकी है। निर्यात को बढ़ावा देने के उपायों और व्यापार समझौतों में शामिल होने के कारण आयुष और हर्बल उत्पादों के निर्यात में 6.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2023-24 में 64.92 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 68.88 करोड़ हो गया है।
देश की पारंपरिक दवाओं की होगी वैश्विक पहुंच
आयुष उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए चार साल पहले आयुष निर्यात संवर्द्धन परिषद (आयुषएक्सिल) की स्थापना की गई थी। बता दें कि यह परिषद आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर काम करती है, और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सहयोग से आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, होम्योपैथी और अन्य भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों से संबंधित उत्पादों और सेवाओं के निर्यात की देखरेख करती है। रविवार को परिषद की चौथी वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मंत्रालय ने यह बात कही। मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि आयुषएक्सिल की स्थापना के बाद, यह वृद्धि और तेज हुई है, जो भारत की पारंपरिक दवाओं और हर्बल उत्पादों के लिए बेहतर वैश्विक पहुंच और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को दिखाता है।

