Haryana Power Tariff: हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के समक्ष उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVNL) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) की टैरिफ याचिकाओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने आयोग में आपत्ति दर्ज कराते हुए बिजली वितरण कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि आयोग के बार-बार निर्देशों के बावजूद डिस्कॉम द्वारा वोल्टेज-वार और उपभोक्ता वर्ग-वार सर्विस कॉस्ट स्टडी रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3000 करोड़ रुपये की टैरिफ बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई, जो न तो विधिवत याचिका पर आधारित थी और न ही उपभोक्ताओं व हितधारकों को सुनवाई का अवसर दिया गया। इस मामले में HERC 9 जनवरी को सुनवाई करने जा रहा है।
4484 करोड़ रुपये के घाटे पर सवाल
प्रोफेसर संपत सिंह ने अपने पत्र में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की टैरिफ याचिका में वितरण कंपनियों ने 4484.71 करोड़ रुपये से अधिक के संयुक्त राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है, लेकिन इस घाटे की भरपाई के लिए कोई स्पष्ट कार्ययोजना नहीं बताई गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की गैर-अनुपालन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और पिछले वर्ष की तरह बिना उपभोक्ताओं की जानकारी के टैरिफ नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
हजारों करोड़ के पूंजीगत व्यय को बताया निराधार
पूर्व मंत्री ने डीएचबीवीएन द्वारा प्रस्तावित 2738.69 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब वार्षिक राजस्व (APR) लगभग 1900 करोड़ रुपये है और 2024-25 के लिए टू-अप दावा 1658.36 करोड़ रुपये है, तो यह प्रस्ताव अव्यवहारिक और विचारहीन प्रतीत होता है।
इसी तरह यूएचबीवीएन द्वारा प्रस्तावित 2056 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय को भी प्रतिपूर्ति विवरण और लागत-लाभ विश्लेषण के अभाव में अर्थहीन बताया गया।
ARR रिपोर्ट और सप्लाई लॉस पर आपत्ति
संपत सिंह ने कहा कि डीएचबीवीएन के लिए अनुमानित राजस्व 28,112 करोड़ रुपये दर्शाया गया है, जो करीब 4116 करोड़ रुपये की वृद्धि है। यह वृद्धि मुख्य रूप से फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने से हुई है, जबकि इसे उपभोक्ताओं को टैरिफ में राहत के रूप में दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में वितरण हानि 11.42 प्रतिशत और 2023-24 में 11.35 प्रतिशत रही, जबकि 2024-25 के लिए इसे 9.54 प्रतिशत तय किया गया था। इसके बावजूद 2026-27 के लिए वितरण हानि का लक्ष्य 9.75 प्रतिशत निर्धारित कर दिया गया, जो हानि घटाने के बजाय बढ़ाने जैसा है।
डिस्कॉम के प्रबंधन पर उठे सवाल
पूर्व ऊर्जा मंत्री ने कहा कि भारी पूंजीगत व्यय के बावजूद डीएचबीवीएन ने 2026-27 के लिए वितरण हानि 9.54 प्रतिशत और यूएचबीवीएन ने 9.85 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। ये आंकड़े वास्तविक सुधार के अनुरूप नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि HT-LT अनुपात में सुधार को देखते हुए वितरण हानि 6 से 8 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन दोनों डिस्कॉमों का परिचालन और राजस्व प्रबंधन कमजोर बना हुआ है, जिससे कार्यशील पूंजी और ब्याज भार लगातार बढ़ रहा है।



