आरबीआई द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से स्थिति हुई स्पष्ट
India’s foreign exchange reserves (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : वैश्विक उठापटक के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का लगातार मजबूत बना रहना एक बड़ी प्राप्ति है। स्विटरलैंड के दावोस में डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक में जहां भारत की अर्थव्यवस्था पर दुनिया भर ने उम्मीद जताई है। वहीं देश के मुद्रा भंडार ने भी 700 बिलियन डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है।
आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों की बात करें तो यह स्पष्ट होता है कि 16 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 14.167 बिलियन डॉलर की भारी छलांग दर्ज की गई, जिससे कुल भंडार बढ़कर 701.36 बिलियन डॉलर हो गया है। यह उछाल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच आया है। इससे ठीक पिछले सप्ताह में, समग्र भंडार में 392 मिलियन डॉलर की मामूली वृद्धि हुई थी, जिससे कुल आंकड़ा 687.193 बिलियन डॉलर रहा था।
2025 में एफडीआई में आया बड़ा उछाल
एक तरफ जहां देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत बना हुआ है। वहीं संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई के प्रवाह में 73 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देश चीन में लगातार तीसरे वर्ष विदेशी निवेश कम हुआ है।
डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर
देश के लिए चिंता की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। मुद्रा बाजार में भारी उथल-पुथल का दौर जारी है। भारतीय मुद्रा रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। डॉलर की मजबूती और बाजार के दबाव के चलते रुपये ने अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जो आयातकों और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है। ताजा कारोबारी सत्र के अंत में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 91.93 (अस्थायी) पर स्थिर हुआ। यह आंकड़ा ‘प्रोविजनल’ (अस्थायी) क्लोजिंग का है, जो दशार्ता है कि मुद्रा पर दबाव कितना तीव्र है। यह गिरावट मुद्रा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक पड़ाव है।
ये भी पढ़ें : Business News Hindi : भारत की टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता पर दुनिया का भरोसा : वैष्णव

