ग्रामीण विकास के बिना भारत के विकास की परिकल्पना अधूरी
Budget 2026 (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : हर साल देश का बजट पेश किया जाता है। इसमें देश के हर समाज और वर्ग को ध्यान में रखकर नीतियां और बजट बनाया जाता है। जिसके बाद पूरा साल लगभग उसी पर काम किया जाता है। इस साल का बजट पेश होने में अब मात्र कुछ दिन का ही समय शेष बचा है। हर साल की तरह इस साल भी ग्रामीण भारत और इसके उद्योग धंधों को लेकर बजट से विशेष उम्मीद जताई जा रही है। दरअसल भारत एक कृषि प्रधान देश है और कहा जाता है कि देश की प्रगति का रास्ता गांव की गलियों से होकर गुजरता है। इसलिए इस बार भी देश के किसान वर्ग इस बजट से विशेष उम्मीद लगाए बैठें हैं।
कृषि और डेयरी सेक्टर की उम्मीदों पर खरा उतरे बजट
हर साल की तरह इस बार भी किसानों को उम्मीद है कि देश का बजट कृषि और डेयरी सेक्टर के अनुकूल हो। ताकि किसानों का जीवन स्तर ऊंचा उठ सके। दैनिक उपभोग की वस्तुएं बनाने वाली एफएमसीजी उद्योग सरकार से आगामी केंद्रीय बजट में उपभोग वृद्धि और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख अपेक्षाओं में निरंतर पूंजीगत व्यय, लक्षित कर सुधार और विनिर्माण तथा उद्योग को समर्थन देना शामिल है।
सरकार खपत बढ़ाने वाले उपायों की घोषणा करें, विशेषकर होम केयर उत्पादों पर 18 प्रतिशत कर लगता है, जिसे 5 प्रतिशत के कर स्लैब लाने की मांग हो रही है। बावजूद इसके पिछले साल ही सरकार ने जीएसटी 2.0 कटौती के बाद खपत को लगातार फोकस करने से ग्रोथ को बनाए रखने में मदद मिली है। उद्योग की प्राथमिक देने के साथ उपभोग को बढ़ावा देने के लिए कुशल उपायों पर ध्यान देने की मांग की है ।
उन्होंने श्रम और जल-गहन श्रेणियों से जुड़ी बुनियादी ढांचे के लिए उच्च आवंटन का सुझाव भी दिया है। मैरिको लिमिटेड के एमडी और सीईओ, सौगत गुप्ता ने कहा कि लक्षित कर सुधार, निरंतर पूंजीगत व्यय और उद्यमिता व नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां महत्वपूर्ण हैं, जिन पर बजट में जोर होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बुनियादी ढांचे और व्यापार करने में आसानी पर सरकारी हस्तक्षेपों से आर्थिक माहौल में सुधार हुआ है।
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