वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में रखी गई आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : गुरुवार को संसद में बजट सत्र के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट जब लोकसभा में रखी तो उसमें एक तरफ जहां देश की अर्थव्यवस्था के विकास और गति के नए आंकड़े सामने आए वहीं कुछ ऐसे तथ्य भी उजागर हुए जिनपर ध्यान देने की जरूरत है। इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि एक तरफ जहां भारत की जीडीपी विकास दर अच्छी गति से विकास करेगी वहीं वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हमें सतर्क रहने की जरूरत है।
विश्व व्यापार के बदलते अंदाज और मायनों के बीच तेजी से अपना रुख बदलना होगा। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि महंगाई ‘नियंत्रित’ है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान घरेलू मुद्रास्फीति औसतन 1.7% रही है। कोर इन्फ्लेशन में कमी यह संकेत देती है कि सप्लाई-साइड की स्थिति में सुधार हुआ है।
बाहरी मोर्चे पर खतरा बरकरार
सर्वे ने एक महत्वपूर्ण ‘विरोधाभास’की ओर इशारा किया है। जहां भारत के घरेलू फंडामेंटल मजबूत हैं, वहीं बाहरी मोर्चे पर जोखिम बरकरार हैं। विशेष रूप से पूंजी प्रवाह और करेंसी पर दबाव चिंता का विषय है। विदेशी पूंजी के सूखे के कारण 2025 में रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारा है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8% रहा, जो बजट अनुमानों से बेहतर है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसे 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
बनी रहेगी जीडीपी की रफ्तार
स्थिर और मजबूत सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहेगी। हालांकि, यह चालू वित्त वर्ष (2025-26) के अनुमानित 7.4% से थोड़ी कम है, लेकिन वैश्विक मंदी के माहौल में यह आंकड़ा भारत की स्थिरता को दर्शाता है। संसद में आज पेश किए गए ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26’ ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मिली-जुली तस्वीर पेश की है। सरकार ने साफ किया है कि अगले वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, सर्वे में आगाह किया गया है कि कमजोर होता रुपया और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतें महंगाई को थोड़ी हवा दे सकती हैं।
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