Haryana Education News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सरकार ने एक बड़ा और भविष्य से जुड़ा फैसला लिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक सेमिनार कार्यक्रम में घोषणा की कि राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ा जाएगा। इसके तहत छात्रों को रोबोटिक्स, कोडिंग, एग्रोटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक और रोचक विषयों की पढ़ाई करवाई जाएगी, ताकि वे बदलती तकनीकी दुनिया के साथ कदम से कदम मिला सकें।
सरकार का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इस योजना के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर रही है। दरअसल, हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर साइंस विषय के शिक्षकों की भारी कमी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में कंप्यूटर साइंस के कुल 2230 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 371 शिक्षक ही वर्तमान में कार्यरत हैं। शेष 1859 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब स्कूलों में कंप्यूटर साइंस के शिक्षक ही पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं हैं, तो विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उससे जुड़े विषयों की पढ़ाई आखिर कौन करवाएगा। यह स्थिति साफ तौर पर बताती है कि नीति और जमीनी स्तर की तैयारी के बीच बड़ा अंतर है।
इस कमी के पीछे भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। अभ्यर्थी एवं सेक्टर 1-4 निवासी प्रवीन मोर ने बताया कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के ढुलमुल रवैये के कारण पिछले सात वर्षों से कंप्यूटर साइंस विषय का परिणाम जारी नहीं किया गया है। इस वजह से करीब 6100 भावी शिक्षक वर्षों से असमंजस की स्थिति में हैं और उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है।
रिजल्ट अटका होने के कारण ये अभ्यर्थी मजबूरी में निजी स्कूलों में पढ़ाने को विवश हैं, जहां उन्हें 10 से 15 हजार रुपये मासिक मेहनताना मिलता है। कम वेतन और अनिश्चित भविष्य के चलते ये भावी गुरुजी आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई को सफल बनाना चाहती है, तो सबसे पहले कंप्यूटर साइंस विषय के लंबित परिणाम जारी कर शिक्षकों की बहाली करनी होगी। बिना प्रशिक्षित शिक्षकों के AI, कोडिंग और रोबोटिक्स जैसे विषय केवल घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएंगे।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षक भर्ती की दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाती है।

