हरियाणा में समाज कल्याण विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश के करीब 66 हजार पेंशन लाभार्थियों की वृद्धावस्था पेंशन रोक दी है। इनमें वे बुजुर्ग शामिल हैं जिनकी आयु 60 वर्ष से कम पाई गई है या फिर जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक दर्ज है। इससे पहले भी विभाग द्वारा 37 हजार लाभार्थियों की पेंशन रोकी जा चुकी है, जिसके बाद अब यह संख्या और बढ़ गई है।
हालांकि विभाग के सामने ऐसे कई मामले भी आए हैं, जिनमें परिवार पहचान पत्र (PPP) में बुजुर्गों की उम्र गलती से कम दर्ज हो गई है। इसी वजह से विभाग ने प्रभावित लाभार्थियों को राहत देते हुए उन्हें अपनी वास्तविक उम्र से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। इसके लिए लाभार्थियों के मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजे गए हैं, जिसके बाद बड़ी संख्या में बुजुर्ग इन दिनों समाज कल्याण विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी लाभार्थी की उम्र वास्तव में 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो वे अपने जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज या अन्य वैध रिकॉर्ड विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद ही पेंशन दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा। इस मामले में समाज कल्याण मंत्री और संयुक्त निदेशक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
अगर नियमों की बात करें तो वर्ष 2014 से पहले वृद्धावस्था पेंशन के लिए एक विशेष कमेटी गठित होती थी, जिसमें डॉक्टर, जिला समाज कल्याण अधिकारी और गांव का सरपंच शामिल रहता था। यही कमेटी बुजुर्ग व्यक्ति की उम्र का निर्धारण करती थी। इसके बाद जन्म प्रमाण पत्र, वोटर कार्ड और मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर उम्र तय की जाने लगी।
समय के साथ नियमों में बदलाव हुआ और बाद में दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र तथा 1991 से पहले का पांच साल पुराना वोटर कार्ड आयु प्रमाण पत्र के रूप में मान्य किया गया। लेकिन अप्रैल 2023 से नियम पूरी तरह बदल गए, जिसके तहत वृद्धावस्था पेंशन के लिए केवल परिवार पहचान पत्र को ही आधार बना दिया गया। अब सभी पेंशन इसी रिकॉर्ड के अनुसार स्वीकृत की जाती हैं, जिससे बड़ी संख्या में बुजुर्ग तकनीकी खामियों के चलते पेंशन से वंचित हो रहे हैं।

