सरकार का दावा, इससे भारतीय किसानों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत और अमेरिका के बीच होने जा रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर एक तरफ जहां विपक्षी पार्टियां सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगा रहीं हैं वहीं भारतीय सरकार ने इस समझौते से जुड़ी जानकारियां साझा की हैं। इन्हीं में से एक अहम जानकारी यह है कि अमेरिका से होने जा रहे इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर बहुत सीमित रियायत दी है।
यह छूट कोटा आधारित है और कुल घरेलू खपत का केवल एक छोटा हिस्सा कवर करती है। इससे बाजार और किसानों पर बड़े असर की आशंका को कम बताया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक भारत ने डीडीजीएस यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन तक शुल्क रियायत दी है।
देश में डीडीजीएस की कुल खपत 500 लाख टन
देश में पशु चारे की कुल खपत करीब 500 लाख टन है। इस हिसाब से अमेरिकी कोटा सिर्फ एक फीसदी बैठता है। सरकार का कहना है कि यह आयात घरेलू कमी को पूरा करने और चारे की लागत को स्थिर रखने में मदद करेगा। अधिकारियों ने बताया कि डीडीजीएस के सीमित आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव कम होगा। इससे इंसानों के खाने लायक अनाज को पशु चारे में लगाने की जरूरत घटेगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन क्षेत्र को लागत में उतार-चढ़ाव से राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी मदद मिल सकती है।
भारत अन्य देशों से भी आयात करता है
पिछले कुछ वर्षों में मांग बढ़ने के कारण भारत को पशु आहार और उससे जुड़े उत्पादों का आयात करना पड़ा है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों के दबाव के चलते करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील आयात किया गया था। छह लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल से आया। इसके अलावा म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का तथा अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का आयात भी हुआ है।
सोयाबीन तेल और चारे पर उद्योग सतर्क
व्यापार समझौते के मसौदे का खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क स्वागत किया है। समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। बदले में भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान, सोयाबीन तेल, पशु चारा, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाएगा या खत्म करेगा। हालांकि उद्योग जगत टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों के स्पष्ट विवरण का इंतजार कर रहा है।
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