भारत और अमेरिका के बीच होने जा रहे द्विपक्षीय समझौते को लेकर उठाए सवाल
India-US Trade (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच होने जा रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर दोनों देश इसे अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। वहीं देश की विपक्षी पार्टियां समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहीं हैं। विपक्ष का कहना है कि यह समझौता अमेरिका के दबाव में आकर भारत कर रहा है। इस सभी को लेकर विपक्ष संसद के अंदर और बाहर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है।
इस बार राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात करती है, वह अब ट्रंप पर निर्भर होती नजर आ रही है।
देश की विदेश और आर्थिक नीति पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार ने भारत की विदेश और आर्थिक नीतियों को अमेरिका के साथ संरेखित करने पर सहमति जताई है, जो देश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कार्यकारी आदेशों का हवाला देते हुए संकेत दिया गया है कि यदि भारत रूसी तेल की खरीद जारी रखता है तो 25 प्रतिशत का दंडात्मक टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है।
ट्रेड डील पर स्थिति स्पष्ट करें पीएम
सिब्बल ने यह भी दावा किया कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान और सेवाएं खरीदने पर सहमति जताई है और इस पूरे समझौते पर प्रधानमंत्री को संसद में आकर स्पष्ट बयान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी चुनाव जीतना जानती है, लेकिन शासन करना नहीं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेवा तीर्थ, कर्तव्य भवन-1 और 2 के उद्घाटन का जिक्र करते हुए सिब्बल ने सवाल किया कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री ने देश के प्रति कौन सा कर्तव्य निभाया है। उन्होंने कहा कि इमारतें बनाना अच्छी बात है, लेकिन शासन और नीतियों पर जवाबदेही भी जरूरी है।
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