UNHRC 61st Session, (द भारत ख़बर), संयुक्त राष्ट्र: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि हमें खासकर मानवाधिकारों के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण अख्तियार करते हुए इस मामले में हमेशा राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर बात करनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र में अपने वर्चुअल संदेश में उन्होंने यह बात कही।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करने की जरूरत
विदेश मंत्री ने आतंकी करतूतों पर जीरो टॉलरेंस की वकालत की। साथ ही अपने संदेश में उन्होंने महामारी व जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का भी जिक्र किया है। जयशंकर ने क्षमता निर्माण, विकास और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करने की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने बुधवार को कहा, मानवाधिकारों का मुख्य उद्देश्य सबसे कमजोर वर्ग के लोगों के दैनिक जीवन में ठोस सुधार लाना होना चाहिए।
विभाजन की जगह सहमति पर जोर
जयशंकर ने कहा, अनिश्चितता, संघर्ष व ध्रुवीकरण से ग्रस्त विश्व में भारत साझा आधार खोजने व उसका विस्तार करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा, हमने निरंतर टकराव के स्थान पर संवाद, संकीर्ण हितों की जगह मानव-केंद्रित विकास और विभाजन की जगह सहमति पर जोर दिया है। एस जयशंकर ने कहा कि यूएन व मानवाधिकार परिषद को आतंकी कृत्यों के लिए जीरो सहिष्णुता की वकालत करनी चाहिए। आतंकी कृत्य मानवाधिकारों का सबसे जघन्य उल्लंघन है। आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता। इसमें मासूम लोगों को टारगेट किया जाता है।
भारत 7वीं बार मानवाधिकार परिषद का सदस्य चयनित
भारत हाल ही में सातवीं बार मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया है और उसे संयुक्त महासभा में 188 में से 177 मत मिले। जयशंकर ने कहा कि यह वैश्विक समुदाय, खासकर वैश्विक दक्षिण के देशों के भरोसे को दशार्ता है। उन्होंने कहा कि भारत मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए राजनीति, दोहरे मानदंड और चयनात्मक रवैये के बजाय संवाद, साझेदारी और क्षमता निर्माण पर विश्वास करता है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसलिए सभी लोगों के लिए वह समानता व सम्मान के आधार पर मानवाधिकारों की रक्षा को बचनबद्ध है। जयशंकर ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, इस सुविधा से करोड़ों लोगों को पारदर्शी ढंग से वित्तीय सेवा, कल्याणकारी योजनाओं व सरकारी सुविधाओं तक पहुंच मिली है। विदेश मंत्री ने बताया कि भारत अपना अनुभव वैश्विक हित में शेयर कर रहा है। जयशंकर ने कहा, जलवायु परिवर्तन, महामारी, आर्थिक दबाव और भू-राजनीतिक तनाव ने असमानताओं को और इजाफा किया है, जिससे विकास को मानवाधिकारों के मूल आधार के तौर पर देखना जरूरी हो गया है।
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