हरियाणा में शहरीकरण की रफ्तार को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण यानी HSVP ने प्रदेश के 69 शहरों में 500 से अधिक नए सेक्टर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत कुल 1.47 लाख एकड़ जमीन खरीदी जाएगी। पहले चरण में 13 शहरों में करीब 40 हजार एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए ई-भूमि पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सहमति आधारित होगी, जिसमें किसान 30 अप्रैल तक अपनी जमीन बेचने की सहमति ऑनलाइन दे सकेंगे।
प्रदेश सरकार की इस घोषणा के बाद रियल एस्टेट बाजार, स्थानीय प्रशासन और किसानों के बीच हलचल तेज हो गई है। सरकार का दावा है कि यह योजना प्रदेश के संतुलित शहरी विकास, रोजगार सृजन और बेहतर बुनियादी ढांचे के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं किसान संगठनों और जमीन मालिकों के लिए यह फैसला आर्थिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
पहले चरण में जिन शहरों को शामिल किया गया है, उनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला, हांसी, नरवाना और समालखा जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्र शामिल हैं। इनके अलावा पिंजौर-कालका, कोट-बेहला, लाडवा, घरौंडा, नारायणगढ़, पिहोवा और होडल में भी भूमि खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है। इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा।
सरकार द्वारा शुरू किया गया ई-भूमि पोर्टल इस पूरी प्रक्रिया की धुरी है। किसानों और भू-मालिकों को किसी बिचौलिए या दलाल के माध्यम से नहीं बल्कि सीधे पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इच्छुक भू-मालिक अपनी जमीन का विवरण, खसरा नंबर, रकबा और अपेक्षित दर ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित विभाग द्वारा मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। दो माह तक पोर्टल खुला रहेगा ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में नए सेक्टर बसने से रियल एस्टेट निवेश को नई गति मिलेगी। इन शहरों में पहले से ही आवासीय और व्यावसायिक मांग अधिक है। ऐसे में नियोजित तरीके से सेक्टर विकसित होने से अनियोजित कॉलोनियों की समस्या कम होगी और ट्रैफिक, सीवरेज, जलापूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार संभव होगा।
प्रदेश सरकार का यह कदम केवल शहरी विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर सेक्टर विकसित होने से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और औद्योगिक इकाइयों के लिए संस्थागत भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छोटे शहरों में भी महानगरों जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
हालांकि, जमीन खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित मुआवजा सबसे अहम मुद्दा रहेगा। किसानों की सहमति आधारित मॉडल को सरकार ने प्राथमिकता दी है। यदि किसान अपनी इच्छा से जमीन बेचते हैं तो विवाद की संभावना कम रहेगी। जानकारों के अनुसार, ई-भूमि पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने से भ्रष्टाचार और मनमानी की गुंजाइश घटेगी।
इस योजना को प्रदेश में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण की जरूरतों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हरियाणा में पिछले एक दशक में शहरी आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषकर एनसीआर से जुड़े शहरों में आवासीय मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नियोजित सेक्टर विकास से दीर्घकालिक शहरी प्रबंधन आसान होगा।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि पहले चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दूसरे चरण में अन्य शहरों को भी शामिल किया जाएगा। कुल 1.47 लाख एकड़ भूमि खरीद का लक्ष्य प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़ी शहरी विकास पहल में से एक माना जा रहा है। यदि यह योजना तय समय सीमा में सफलतापूर्वक लागू होती है तो हरियाणा के शहरी परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
किसानों के लिए 30 अप्रैल अंतिम तिथि तय की गई है। इसलिए इच्छुक भू-मालिकों को सलाह दी जा रही है कि वे समय रहते पोर्टल पर अपनी सहमति दर्ज कराएं और सभी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करें। सरकार का दावा है कि प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी, जिससे भुगतान और स्वामित्व हस्तांतरण में देरी नहीं होगी।
प्रदेश में 69 शहरों में 500 से अधिक सेक्टर बसाने की यह योजना आने वाले वर्षों में हरियाणा की आर्थिक और सामाजिक संरचना को नई दिशा दे सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पहले चरण में कितने किसान आगे आते हैं और जमीन खरीद की प्रक्रिया कितनी सुचारु रूप से पूरी होती है।

