ईरान की शर्त- आगे हमला नहीं होगा इसकी गारंटी चाहिए, मुआवजा भी मांगा
US Israel Vs. Iran War, (द भारत ख़बर), तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी: डोनाल्ड ट्रम्प की टीम ईरान के साथ सीजफायर पर बात करना चाहते हैं। इस काम में ट्रम्प के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी लगे हुए हैं। यह जानकारी एक्सियोस न्यूज ने दी है। हालांकि ईरान ने बातचीत के लिए शर्त रखी है कि पहले जंग रोकी जाए और उसे हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए। ईरान का यह भी कहना है कि भविष्य में उस पर फिर से हमला नहीं होगा, इसकी पक्की गारंटी मिले।
मिस्र, कतर और ब्रिटेन निभा रहे मध्यस्थ का रोल
दूसरी तरफ, ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि वे अभी ईरान की सभी शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं हैं, खासकर मुआवजे की मांग को। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत फिलहाल नहीं हो रही है। लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे देश मध्यस्थ का रोल निभा रहे हैं।
ईरान अपना मिसाइल प्रोग्राम बंद करें
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना मिसाइल प्रोग्राम कुछ समय के लिए बंद करे, यूरेनियम एनरिचमेंट रोक दे और अपने परमाणु ठिकानों को भी बंद करे। इसके अलावा, ईरान हिजबुल्लाह और हमास को पैसे देना भी बंद करे।
ब्रिक्स देश हमला रोकने में रोल निभाएं
ईरान के राष्ट्रपति मसूज पजशकियान ने शनिवार को पीएम मोदी से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को ईरान पर हो रहे हमले रोकने में भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को बिना किसी दबाव के, अपने दम पर काम करना चाहिए और इस मामले में आगे आना चाहिए। ईरान के राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि मिडिल ईस्ट के देशों को मिलकर एक नया सुरक्षा सिस्टम बनाना चाहिए। इससे इलाके में शांति और स्थिरता बनी रहेगी और बाहर के देशों का दखल कम होगा।
ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी अरब सागर में तैनात
ब्रिटेन की एक न्यूक्लियर पावर से चलने वाली पनडुब्बी अरब सागर में पहुंच गई है। इस पनडुब्बी का नाम एचएमएस एंसन है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह पनडुब्बी लॉन्ग रेंज टॉमहॉक मिसाइलों और ताकतवर टॉरपीडो से लैस है। यह अभी अरब सागर के उत्तरी हिस्से में मौजूद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से मंजूरी मिलती है, तो यह पनडुब्बी सतह के पास आकर मिसाइल दाग सकती है। इससे पहले ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की इजाजत भी दी है, ताकि होर्मुज स्ट्रेट में हमले करने वाली मिसाइल साइट्स को निशाना बनाया जा सके।
समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए योजना बना रहा
ब्रिटेन ने यह भी कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए योजना बना रहा है। हालांकि उसने यह भी साफ किया है कि वह इस जंग में पूरी तरह शामिल नहीं होना चाहता। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर उसने अमेरिका और इजराइल का साथ दिया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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