24 दिन से जारी लड़ाई में ईरान पर नहीं डाल सका दबाव, अब ट्रंप के फैसले पर उठने लगे सवाल
US-Iran War Update (द भारत ख़बर), वॉशिंगटन : अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर जब 28 फरवरी को पहले ही हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता सहित करीब 48 नेताओं और अन्य अधिकारियों को मौत की नींद सुला दिया था तो वह इस युद्ध को बहुत आसान समझने लगा था। अमेरिका को उम्मीद थी की ईरान की सेना बस कुछ ही दिनों में हथियार डाल देगी।
लेकिन हुआ इसके उलट आज युद्ध का 24वां दिन है और ईरान पहले से कहीं ज्यादा आक्रमकता के साथ इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब दे रहा है। युद्ध लंबा खिंचने से जहां अमेरिका को सैन्य क्षति पहुंच रही है वहीं इस युद्ध में उसके लाखों अरबों डॉलर भी नष्ट हो चुके हैं। जिसके चलते जहां अमेरिका के राष्टÑपति सवालों के घेरे में हैं वहीं अब अमेरिका में ही उनके इस फैसले का विरोध होना शुरू हो गया है।
अमेरिका के पूर्व खुफिया प्रमुख ने साधा निशाना
ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका के पूर्व खुफिया प्रमुख लियोन पेनेटा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट काफी हद तक ट्रंप की नीतियों का नतीजा है और अब अमेरिका ऐसी स्थिति में फंस गया है, जहां से निकलना आसान नहीं है। पनेटा ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध का जोखिम नया नहीं था। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस बात से अवगत थीं कि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह खतरा पहले से ज्ञात था, लेकिन मौजूदा संघर्ष में इसे नजरअंदाज किया गया।
ईरान के कम आंकने की गलती
पूर्व सीआईए प्रमुख के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की प्रतिक्रिया को कम आंका या यह मान लिया कि युद्ध जल्दी खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात दिखाते हैं कि तैयारी में कमी थी और अब इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी पड़ रहा है। पनेटा ने यह भी कहा कि शुरूआती सैन्य कार्रवाई से ईरान कमजोर नहीं हुआ, बल्कि वहां की सत्ता और अधिक मजबूत नजर आ रही है। उन्होंने संकेत दिया कि अब नेतृत्व और ज्यादा कठोर रुख अपना रहा है, जिससे हालात और जटिल हो सकते हैं।
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