दिल्ली पुलिस ने मैसूर से पकड़ा शातिर आरोपी, अब तक 1100 से ज्यादा ईमेल करके कई बार पुलिस को दे चुका था चकमा
Delhi Crime News (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, भीड़भाड़ वाले स्थान और खासकर नामी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी देने के आरोपी को आखिरकार पुलिस ने दबोच ही लिया। आरोपी अब तक 11 सौ से ज्यादा ईमेल करके दर्जनों बार दिल्ली पुलिस को सुरक्षा भंग करने के नाम पर छका चुका था। आरोपी की हर बार की धमकी के बाद दिल्ली में सुरक्षा को लेकर पुलिस और अन्य एजेंसियों की अच्छी परेड हो जाती थी। धमकी देने वाली जगह की पूरा-पूरा दिन जांच होती थी लेकिन बाद में कुछ नहीं निकलता था। ऐसी धमकियों से हर बार न केवल सुरक्षा बलों बल्कि हजारों नागरिकों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता था।
दिल्ली पुलिस ने कर्नाटक पुलिस की मदद से पकड़ा
धमकी देकर दहशत फैलाने वाला शातिर श्रीनिवास लुईस (47) मैसूर से पकड़ा गया। आरोपी ने धमकी के 1,100 से ज्यादा ई-मेल किए थे। दिल्ली पुलिस ने उसे कर्नाटक पुलिस के सहयोग से दबोचा। ट्रांजिट रिमांड पर पुलिस उसे दिल्ली लेकर आ रही है। उसके पास से एक लैपटॉप और कई सिम कार्ड जब्त किए गए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, श्रीनिवास कोमैसूर के वृंदावन लेआउट में मकान से दबोचा गया।
वह पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग जगहों से धमकी भरे ईमेल और मैसेज भेजता था। दिल्ली हाईकोर्ट के जज को भी धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था। उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बताया, कई हफ्तों तक चली तकनीकी पड़ताल के बाद संदिग्ध की पहचान हो पाई। आरोपी ने धमकी भरे मैसेज भेजने की बात कबूली है।
आरोपी के बारे में जानकारी जुटा रही पुलिस
बंगलूरू का रहने वाला श्रीनिवास पोस्टग्रेजुएट है। फिलहाल बेरोजगार है और अपनी मां के साथ रहता है। उसकी मां रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं। शुरूआती जांच से लगता है कि वह शायद मानसिक तनाव से जूझ रहा था। अधिकारियों ने कहा कि उसने जान-बूझकर अदालतों और स्कूलों, कॉलेजों को निशाना बनाया, ताकि ज्यादा दहशत फैलाई जा सके। श्रीनिवास की इन झूठी धमकियों की वजह से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े, कई जगहों से लोगों को बाहर निकालना पड़ा और कई संस्थानों का कामकाज भी ठप हो गया।
पुलिस पूछताछ के बाद ही स्थिति होगी साफ
दिल्ली पुलिस की आरोपी से पूछताछ के बाद ही पूरी स्थिति साफ हो पाएगी। यह पता लग पाएगा कि शुरुआती जांच में जो सामने आया है वही कारण सत्य हैं या फिर आरोपी किसी विदेशी अथवा आतंकी एजेंसी के संपर्क में था जिसके चलते वह झूठी अफवाह फैलाकर दहशत फैलाने की कोशिश कर रहा था।
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