
इस्लामिक गार्ड के हाथ में पूरा कंट्रोल
US Israel Vs Iran War, (द भारत ख़बर), तेहरान: ईरान में सरकार और धार्मिक सेना के बीच टकराव बढ़ने की खबर है। तेहरान टाइम्स रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ताकतवर सेना जैसी संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। अखबार के मुताबिक आईआरजीसी ने देश का कंट्रोल अब अपने हाथ में ले लिया है।
दावा यह भी है कि राष्ट्रपति पजशकियान की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से नहीं हो पा रही है। दरअसल इस हफ्ते की शुरूआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। ट्रम्प के मुताबिक, उनकी टीम कुछ समझदार ईरानी नेताओं के संपर्क में है और बातचीत के जरिए हालात को शांत करने की कोशिश की जा रही है।
ईरान ने ट्रम्प के दावे को किया खारिज
हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं चल रही है। ट्रम्प का दावा खारिज होने के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर ईरान में असली कंट्रोल किसके पास है।
राष्ट्रपति के फैसलों में दखल दे रही आईआरजीसी
रिपोर्ट के मुताबिक पजशकियान कोई बड़ा फैसला नहीं ले पा रहे हैं। आईआरजीसी जिसका काम अमेरिका के हमलों का जवाब देना था, अब सरकार की अहम फैसले भी ले रहा है। अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पजशकियान ने 26 मार्च को नया खुफिया मंत्री नियुक्त करने की कोशिश की थी। वे हुसैन देहगान को यह पद देना चाहते थे, लेकिन आईआरजीसी चीफ अहमद वहीदी ने इसे रोक दिया। वहीदी ने यह पद तब संभाला था, जब युद्ध की शुरूआत में पिछले कमांडर मोहम्मद पाकपुर मारे गए थे।
युद्ध की स्थिति में सभी अहम और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति आईआरजीसी ही करेगा
वहीदी का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सभी अहम और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति आईआरजीसी ही करेगा और वही उन्हें संभालेगा। आमतौर पर ईरान की व्यवस्था में राष्ट्रपति खुफिया मंत्री का नाम तभी तय करते हैं, जब सुप्रीम लीडर की मंजूरी मिल जाती है, क्योंकि सुरक्षा से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार उन्हीं के पास होता है।
ईरान जंग में शामिल हो सकता है यूएई
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) वर-ईरान जंग में सीधे तौर पर शामिल होने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा हैं। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खोलने के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा रही है।
इसके तहत हार्मुज सिक्योरिटी फोर्स बनाई जाएगी, जो जहाजों की सुरक्षा तय करेगी। होर्मुज एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इसे बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। UAE पहला खाड़ी देश बन सकता है जो इस जंग में सीधे हिस्सा लेगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने सीजफायर की अपील की: ट्रम्प
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। ईरान की नई लीडरशिप पहले के मुकाबले कम कट्टर और ज्यादा समझदार है। हालांकि, ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका तुरंत सीजफायर नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका अपना मिलिट्री आॅपरेशन जारी रखेगा।
यूएई से एलपीजी लेकर दो टैंकर भारत पहुंचे
वहीं मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। यूएई से एलपीजी (रसोई गैस) लेकर आए दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करके सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गए हैं। पहला टैंकर BW TYR 31 मार्च को मुंबई पहुंचा।
यह जहाज UAE के रास अल खैमाह से चला था और करीब 6 दिन में भारत पहुंचा। दूसरा टैंकर BW ELM 1 अप्रैल को न्यू मैंगलोर के पास पहुंचा। इन दोनों जहाजों में करीब 94,000 टन LPG और 50 से ज्यादा भारतीय नाविक भी मौजूद थे। सरकार के मुताबिक, अब तक 8 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं।
बहरीन में अमेजन आॅफिस पर हमला
ईरान ने बहरीन में आज अमेरिकी कंपनी अमेजन वेब सर्विस के एक डेटा सेंटर पर हमला किया। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, हमले के बाद उस जगह पर आग लग गई। इससे पहले बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी बताया था कि एक कंपनी की इमारत में आग लगी है, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम बुझा रही थी। हालांकि उस समय कंपनी का नाम नहीं बताया गया था। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मिडिल ईस्ट में काम कर रही 18 अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, एपल, गूगल, मेटा जैसी कंपनियां शामिल हैं।
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