US Think Tank Report, (द भारत ख़बर), वॉशिंगटन: अमेरिकी थिंक टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर’ का दावा है कि ईरान की अधिकतर बैलिस्टिक मिसाइलें युद्ध में बेअसर हैं और वे अपने तय मिशन को पूरा नहीं कर सकतीं। रिपोर्ट में हालिया यूएस खुफिया आकलन का हवाला देते हुए बताया गया है कि ईरान के 50 प्रतिशत मिसाइल लॉन्चर अभी भी सही-सलामत हैं। हालांकि, कोई भी लॉन्चर यूनिट तब युद्ध में बेअसर मानी जाती है—भले ही उसे कोई नुकसान न पहुंचा हो—जब वह अपने तय मिशन को पूरा करने में असमर्थ हो।
मध्यम-दूरी की मिसाइल क्षमता हुई काफी कमजोर
थिंक टैंक ने बताया कि ईरान की मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता काफी कमजोर हो गई है, जबकि कम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता ने लगातार हमलों को अंजाम दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ईरान से जुड़े मिसाइल खतरे का सटीक आकलन करने के लिए, विभिन्न प्रकार की मिसाइलों के बीच अंतर करना जरूरी है।
कई मिसाइल लॉन्चर युद्ध के लिए बेकार किए
रिपोर्ट में बताया गया है कि संयुक्त सेना ने ईरान के कई मिसाइल लॉन्चरों को युद्ध के लिए बेकार कर दिया है, लेकिन यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि ये लॉन्चर मध्यम-दूरी या कम-दूरी वाली प्रणालियों के लिए हैं, या क्या इनमें से कोई भी लॉन्चर मध्यम-दूरी और कम-दूरी वाली प्रणालियों के बीच आपस में बदले जा सकते हैं। ईरानी मिसाइल हमले की दर से पता चलता है कि ईरान की मध्यम-दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल सेना काफी कमजोर हो गई है।
इस मामले में सेना की स्थिति अभी भी साफ नहीं
रिपोर्ट के अनुसार कम-दूरी वाली मिसाइल के मामले में सेना की स्थिति अभी भी साफ नहीं है। पॉलिसी रिसर्च सेंटर ने यह भी बताया कि 28 फरवरी से शुरू हुए यूएस-इजरायल के हमलों ने ईरानी सेनाओं के बीच एक व्यापक डर पैदा कर दिया है, जिसके कारण 20 मार्च से मिसाइल हमले कम हो गए हैं। रिपोर्ट में ईरानी सशस्त्र बलों के बीच भर्ती और सैनिकों को बनाए रखने (रिटेंशन) की समस्या होने का भी दावा किया गया।
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