
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को न सुधरने वाला बताया
Netaji National Son, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रपुत्र घोषित करने और आजाद हिंद फौज को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली पीआईएल खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को न सुधरने वाला बताया और सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी रोक लगाई जा सकती है।
साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि भविष्य में उनकी कोई पीआईएल मंजूर न की जाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वह पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल कर चुके हैं और अब अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।
2 साल पहले भी खारिज हो चुकी याचिका
मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। उस मामले में, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाया था। साथ ही चुनावों के संदर्भ में याचिका दायर करने के समय पर सवाल पूछा था।
याचिकाकर्ता की मांगें
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र के रूप में मान्यता दी जाए।
- भारतीय राष्ट्रीय सेना के स्थापना दिवस 21 अक्टूबर, 1943 को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए।
- नेताजी की जयंती 23 जनवरी 1897 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाए। उनके जन्मस्थान (कटक, ओडिशा) को राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाए।
- आजादी का श्रेय उन क्रांतिकारियों को दिया जाए जिन्होंने अहिंसा का पालन नहीं किया, और साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली कठअ को भी।
- 1947 में भारत की आजादी से जुड़ी असल सच्चाई वाली रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, कि ब्रिटिश लोग भारत छोड़कर क्यों और किन कारणों से गए।
- 1946-1947 के दौरान भारतीय सैनिकों (नौसेना, वायुसेना, थलसेना) और आम नागरिकों के विद्रोह की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।
- नीरा आर्य को राष्ट्र-पुत्री घोषित किया जाए।
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