ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से किया इंकार
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच स्थाई शांति समझौता होने के बावजूद तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसी स्थिति के चलते पिछले दिनों दोनों देशों ने एक दूसरे पर फिर से हमले बोल दिए थे। जिससे दोनों देशों के बीच शांति समझौता भी खतरे में पड़ गया था। हालांकि इसके बाद अमेरिका की तरफ से दावा किया गया था कि बातचीत के माध्यम से दोनों ने सभी मतभेद सुलझा लिए हैं।
लेकिन इस बीच ईरान ने अमेरिका के साथ कतर की राजधानी दोहा में होने वाली संभावित वार्ता की खबरों को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई बातचीत तय नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि अंतिम समझौते पर औपचारिक वार्ता शुरू होने की स्थिति अभी नहीं बनी है।
इस्माइल बघाई ने पत्रकारों के साथ यह जानकारी साझा की
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रेस वार्ता में कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की कतर यात्रा का अमेरिकी अधिकारियों की यात्रा से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दौरा केवल पहले हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रावधानों, विशेष रूप से अनुच्छेद-11 के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए किया जा रहा है।
इस्माइल बघाई ने बताया कि 14 बिंदुओं वाले एमओयू के अनुच्छेद-13 के अनुसार अंतिम समझौते पर बातचीत तभी शुरू होगी, जब अनुच्छेद 1, 4, 5, 10 और 11 का क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा और लगातार जारी रहेगा। यानी पहले दोनों देशों को भरोसा बढ़ाने वाले शुरूआती कदम लागू करने होंगे, उसके बाद ही व्यापक समझौते पर औपचारिक वार्ता होगी। अनुच्छेद-11 के तहत अमेरिका को ईरान की प्रतिबंधित या फ्रीज की गई संपत्तियों और धन तक उसकी पहुंच बहाल करने के लिए जरूरी अनुमति और लाइसेंस जारी करने होंगे।
ट्रंप ने किया था दोहा में बैठक का दावा
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने अमेरिका से बैठक का अनुरोध किया है और दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार को दोहा में मिलेंगे। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा था कि ‘ईरान ने बैठक का अनुरोध किया है, यह कल दोहा में होगी’। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी कहा कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर दोहा जाएंगे। उनके अनुसार, यह बैठक ईरान के अनुरोध के बाद हो रही है और राष्ट्रपति ट्रंप पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
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