Haryana News, (द भारत ख़बर), अंबाला: हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में बोरवेल में गिरे बच्चे को बचाने की कोशिश असफल रही है। सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय जिला प्रशासन सहित अन्य बचाव एजेंसियों ने घटना के बाद से लगातार मासूम को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया, मगर उसकी जान नहीं बच सकी। सूत्रों के अनुसार लगभग 20 घंटे रेस्क्यू आपरेशन चला। इस घटना ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 2006 में हुए पांच साल के प्रिंस रेस्क्यू केस की याद दिला दी है।
मंगलवार सुबह 220 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया था निर्भय
बराड़ा के धनौरा गांव में निर्भय नाम का 4 साल का बच्चा मंगलवार सुबह 220 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया था। हादसे के बाद इमरजेंसी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि निर्भय सुबह करीब 6.30 बजे एक खुले मैदान के पास खेलते समय लगभग 9 इंच चौड़ी पतली खाई में फिसल गया। इसके तुरंत बाद सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को बुलाया गया। पूरा दिन बचाव का काम चलता रहा, लेकिन बच्चा बच नहीं पाया।
डॉक्टरों ने बच्चे को अस्पताल पहुंचने से पहले मृत घोषित किया
अधिकारियों ने बताया कि बोरवेल से बाहर निकालने के बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित (ब्रॉट डेड) कर दिया गया। ब्रॉट डेड मतलब, अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत। बताया गया है कि बच्चा ऐसी जगह फंसा था जहां वाटर लेवल धीरे-धीरे बढ़ रहा था। इस कारण बचाव टीम को शुरूआत से ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एनडीआरएफ असिस्टेंट कमांडेंट अनिल कुमार के मुताबिक पानी का स्तर बढ़ने के साथ-साथ बच्चा धीरे-धीरे नीचे धंस रहा था।
आपरेशन को कई बार नए सिरे से शुरू किया गया
ढीली मिट्टी और लगातार हो रही बारिश के चलते जमीन खिसक हो रही थी, जिससे बचाव टीमों ने कई दफा रेस्क्यू का तरीका चेंज किया। आपरेशन को कई बार नए सिरे से शुरू किया गया। एनडीआरएफ के अनिल कुमार ने बताया कि कई चुनौतियों की वजह से उन्हें आॅपरेशन बार-बार नए सिरे से शुरू करना पड़ा। उन्होंने कहा, बच्चे को बाहर निकालने के अंतिम चरण में टीमों को बच्चे के जिंदा रहने का कोई संकेत नहीं मिला।
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