फरीदाबाद: मानसून की पहली ही बारिश ने फरीदाबाद के मंझावली गांव के किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं. यमुना से सटे इलाके में करीब 150 एकड़ खेती करने वाले 50 से 60 किसान इन दिनों सबसे बड़ी परेशानी का सामना कर रहे हैं. धान की बुवाई का समय चल रहा है, लेकिन खेतों तक पहुंचने वाला रास्ता बारिश के पानी से पूरी तरह डूब चुका है. किसानों का कहना है कि पहले यह रास्ता ठीक था, लेकिन यमुना पुल बनने के दौरान रास्ते से मिट्टी उठाने के बाद यहां गहरा गड्ढा बन गया. अब बारिश होते ही उसमें 5 से 15 फीट तक पानी भर जाता है और खेतों तक पहुंचना नामुमकिन हो जाता है. ऐसे में किसानों को अपनी फसल और रोजी-रोटी की चिंता सता रही है.
10 से 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया
किसान अनिल कुमार लोकल18 से बताते हैं कि वह मंझावली गांव का रहने वाले हैं. करीब 50 से 60 किसानों का यही एक रास्ता था, जिससे हम अपने खेतों तक जाते थे. जब यहां यमुना पुल का निर्माण हुआ तो गाइड बांध बनाए गए और उसी दौरान रास्ते की जमीन भी चली गई. आज तक पंचायत को उसका मुआवजा नहीं मिला और न ही नया रास्ता बनाया गया. सबसे बड़ी दिक्कत यह हुई कि ठेकेदार ने रास्ते से मिट्टी उठाकर गाइड बांध में डाल दी. इसकी वजह से यहां 10 से 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया. अब बारिश के बाद यह पूरा हिस्सा पानी से भर जाता है और रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है.
बताते हैं मैं उन किसानों में शामिल जिनकी पूरी खेती इसी रास्ते पर निर्भर है. करीब 150 एकड़ जमीन पर खेती होती है और 60 से 70 किसानों की रोजी-रोटी इसी से चलती है. धान की बुवाई का समय निकल रहा है लेकिन खेतों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. यमुना का जलस्तर भी धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा, जिससे परेशानी और बढ़ जाएगी. अनिल ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने गलत तरीके से रास्ते की मिट्टी उठाई, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था. आज यहां झील जैसी स्थिति बन गई है. हमने इस मामले की शिकायत कई बार मुख्यमंत्री, डीसी और सरपंच तक की जा चुकी है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला. अब किसान बार-बार चंडीगढ़ जाकर अधिकारियों के चक्कर कैसे लगाए.
खेत तक पहुंचने का नहीं है रास्ता
मंझावली गांव का रहने वाले किसान अक्षय बताते हैं कि 5 एकड़ जमीन है. खेतों तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है. गड्ढे में 5 से 7 फीट तक पानी भरा हुआ है. न ट्रैक्टर निकल सकता है और न ही बाइक. ऐसे में धान की बुवाई करना बहुत मुश्किल हो गया है. कई बार प्रशासन को आवेदन दिए गए. लेकिन अब तक किसी ने इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया. गांव के सभी किसानों की जमीन इसी तरफ है और हर कोई परेशान है. सिर्फ धान ही नहीं.. यहां कई किसान सब्जियों की खेती भी करते हैं, लेकिन रास्ता बंद होने से उनकी मेहनत पर भी असर पड़ रहा है.
प्रशासन करे समाधान
किसान सुंदर लाल बताते हैं पिछले दो से तीन साल से यही परेशानी झेल रहा हूं. ठेकेदार ने रास्ते से मिट्टी उठाकर इसे पूरी तरह खराब कर दिया. अब खेतों तक जाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है. कुछ किसानों ने किसी तरह पहले ही धान की बुवाई कर ली, लेकिन मुझे अभी बुवाई करनी है. रास्ता बंद होने की वजह से खेत तक पहुंचना ही संभव नहीं है. इस समस्या को लेकर कई बार सरपंच से भी बात की गई, लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ. किसानों का कहना है कि अगर जल्द रास्ता नहीं बना तो धान की फसल का समय निकल जाएगा और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
गांव के किसानों की मांग है कि प्रशासन और सरकार इस समस्या का जल्द समाधान करे. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक रास्ते का मामला नहीं है, बल्कि दर्जनों परिवारों की आजीविका का सवाल है. अगर समय रहते रास्ता ठीक नहीं कराया गया तो धान की बुवाई प्रभावित होगी. सब्जियों की खेती पर भी असर पड़ेगा और 150 एकड़ से ज्यादा जमीन पर खेती करने वाले किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

