देश के करीब 70 प्रतिशत हिस्से से मानसून के बादल गायब, पहलगाम में बादल फटा, उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से मची तबाही
Weather Update, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली/श्रीनगर: पहाड़ी राज्यों में बारिश के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने के बाद बाढ़ आई। कई खेत बर्बाद हो गए, सड़क बह गई। उत्तराखंड के विकासनगर में भारी बारिश के कारण लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में लैंडस्लाइड हो गई। कई वाहन और मशीनें मलबे में दब गई।
पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर अब मैदानी राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। प्रयागराज, ऋषिकेश और अन्य क्षेत्रों में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी में पानी बढ़ने के बाद सलाल डैम के कई गेट खोल दिए गए, ताकि जलस्तर नियंत्रित रखा जा सके।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 440 सड़कें बंद
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन के कारण करीब 440 सड़कें बंद हो गई हैं। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से घाट डूब गए हैं, जबकि ऋषिकेश में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने और घाटों पर स्नान न करने की अपील की है।
अगले कुछ दिन कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के दोबारा पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना कम है। राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में गर्मी और उमस बनी रह सकती है। वहीं उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
आईएमडी के अनुसार, 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम नहीं बना, जिससे मानसूनी हवाओं को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी। साथ ही मानसून ट्रफ भी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। इसी वजह से मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं।
अरब सागर, मध्य भारत और दक्षिण भारत तक फैल गई सूखी हवाएं
इधर, देश के लगभग 70% हिस्से से मानसून के बादल गायब हो गए हैं। इसका कारण पाकिस्तान की ओर से आ रही सूखी हवाएं बताई जा रही हैं। मौसम की वेबसाइट आॅल इंडिया वैदर की रिपोर्ट के अनुसार ये सूखी हवाएं अरब सागर, मध्य भारत और दक्षिण भारत तक फैल गई हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में 3 नए सिस्टम बन रहे हैं, अगर इनमें से एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गया तो मानसून फिर से एक्टिव हो सकता है।
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