Pharmacy Officer Paper Leak Case: पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती को लेकर चल रहे विवाद पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। 19 जुलाई को हुई भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के आरोप लग रहे थे। विपक्षी दल पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, जबकि राज्य सरकार पेपर लीक से इनकार कर रही थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान पेपर लीक के मुद्दे को गंभीरता से लिया और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। तब तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक रहेगी।
454 फार्मेसी ऑफिसर पदों पर होनी थी भर्ती
यह मामला बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की ओर से नोटिफाइड 454 फार्मेसी ऑफिसर पदों की भर्ती से जुड़ा है। इन पदों के लिए 19 जुलाई को परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद पेपर लीक होने के आरोप सामने आए थे। इसे लेकर अभ्यर्थियों के बीच भी सवाल उठे और पंजाब की राजनीति में भी मामला गरमा गया। अब इसी मामले में हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर फिलहाल रोक लगा दी है।
पेपर लीक के आरोपों पर क्या हुआ?
फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों को लेकर पंजाब में काफी समय से विवाद चल रहा था। विपक्ष और दूसरे पक्षों की ओर से इस मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की जा रही थी। हाईकोर्ट के सामने मामला पहुंचने के बाद अदालत ने इस पूरे विवाद को गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान पेपर लीक के आरोपों को लेकर अदालत की टिप्पणी सामने आई। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि मामले में अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। अदालत ने संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
हाईकोर्ट के आदेश के क्या मायने?
हाईकोर्ट के इस आदेश का सीधा असर फार्मेसी ऑफिसर भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों पर पड़ेगा। फिलहाल भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यानी जब तक अदालत मामले पर आगे सुनवाई नहीं करती, तब तक भर्ती से जुड़े अगले चरण पर रोक रहेगी। अदालत ने राज्य सरकार और मामले से जुड़े अन्य पक्षों को जवाब देने का मौका दिया है। अब अगली सुनवाई में उनके जवाब और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
सरकार के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
हाईकोर्ट का यह आदेश पंजाब सरकार के लिए राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की ओर से पहले पेपर लीक के आरोपों को लेकर अलग रुख सामने आया था। ऐसे में अब अदालत की टिप्पणी के बाद विपक्ष सरकार पर सवाल उठा सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि अगर पेपर लीक के आरोप सही साबित होते हैं तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी और सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की हुई थी चर्चा
इस मामले में पंजाब के शिक्षा मंत्री को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी हो चुकी है। दिल्ली में पेपर लीक के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया से पंजाब की परीक्षा को लेकर सवाल पूछा गया था। बताया गया कि उस दौरान सिसोदिया ने कहा था कि अगर पंजाब में पेपर लीक होता है तो पार्टी नेतृत्व की ओर से पंजाब के शिक्षा मंत्री को हटाया जाएगा। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

