अंबाला. हरियाणा के अंबाला में बरसात के बाद पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के मामले सामने आने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. जिले के नारायणगढ़ क्षेत्र की एक गौशाला में कुछ गोवंश इस संक्रामक बीमारी की चपेट में पाए गए हैं. हालांकि पशुपालन विभाग की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित पशुओं को रिकवरी में लाने का प्रयास किया जा रहा है. विभाग ने पशुपालकों से सतर्क रहने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु को दूसरे पशुओं से अलग करने की अपील की है. इस बीमारी से ग्रस्त दुधारू पशुओं में मिल्क प्रोडक्शन की कमी आने लगती है. उनके शरीर पर गोल-गोल सर्कल के निशान बनने लगते हैं.
कराया था वैक्सीनेशन
अंबाला पशुपालन विभाग के एसडीओ डॉ. सुदेश कुमार ने लोकल 18 को बताया कि लंपी स्किन डिजीज एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खासतौर पर गाय और बैल जैसे गोवंश को प्रभावित करती है. बरसात के मौसम में इसके फैलने का खतरा अधिक रहता है. नारायणगढ़ क्षेत्र में कुछ पशुओं में बीमारी के मामले सामने आए हैं, जिनकी विभाग लगातार निगरानी रख रहा है. डॉ. सुदेश के मुताबिक, इस बीमारी से बचाव के लिए विभाग की ओर से पहले ही जुलाई महीने की शुरुआत में बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन कराया गया था. इस दौरान जिले में करीब 60 हजार गोवंश को वैक्सीन लगाई गई है. सामान्य तौर पर चार महीने से अधिक उम्र के गोवंश का टीकाकरण किया जाता है, जबकि छोटे बच्चों को यह वैक्सीन नहीं लगाई जाती.
कई बार यह जानलेवा
डॉ. सुदेश का कहना है कि टीकाकरण के बावजूद पशुपालकों को सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि यह बीमारी संक्रमित पशु के संपर्क में आने पर दूसरे पशुओं तक फैल सकती है. लंपी बीमारी के शुरुआती लक्षणों में पशु को तेज बुखार आता है. यह बुखार करीब चार से पांच दिन तक रह सकता है. इसके बाद पशु की त्वचा पर गोल-गोल गांठें या छल्ले दिखाई देने लगते हैं. गंभीर मामलों में यही गांठें घाव का रूप ले सकती हैं. कमजोर इम्युनिटी वाले पशुओं में बीमारी अधिक गंभीर और कई बार यह जानलेवा भी हो सकती है.
संपर्क में आने पर क्या करें
डॉ. सुदेश कुमार ने बताया कि वायरल बीमारी होने के कारण इसके लिए कोई ऐसी विशेष दवा नहीं है जो सीधे वायरस को खत्म कर दे, इसलिए बीमारी से बचाव और समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण है. अगर किसी पशु में लंपी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें. उसके खान-पान की व्यवस्था भी अलग रखी जाए. संक्रमित पशु का जूठा चारा किसी दूसरे पशु को नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारी के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है. अगर कोई व्यक्ति संक्रमित पशु या प्रभावित इलाके के संपर्क में आता है तो घर लौटने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह धोने के बाद ही दूसरे पशुओं के संपर्क में जाए.

