Jet Fuel Price Hike News: हवाई यात्रियों की टेंशन बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। तेल कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल की कीमत में ₹6,280 प्रति किलोलीटर की बढ़ोतरी की है। यह वृद्धि ₹6.28 प्रति लीटर के बराबर है। इसके बाद घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमत ₹1,15,000 से बढ़कर ₹1,21,280 प्रति किलोलीटर हो गई है। लीटर के हिसाब से देखें, तो कीमत ₹121.28 प्रति लीटर हो गई है। नई दरें 1 सितंबर 2026 से लागू हो गई हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो फ्यूल की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस का खर्च बढ़ेगा और जल्द एयर टिकट महंगी हो सकती हैं।
अगस्त में भी बढ़ी थी ATF की कीमत
ATF की कीमत में यह बढ़ोतरी करीब एक महीने में दूसरी बड़ी वृद्धि है। इससे पहले 1 अगस्त 2026 को भी जेट फ्यूल की कीमत में ₹5 प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। अगस्त और सितंबर की लगातार बढ़ोतरी को जोड़ें तो लगभग 30 दिनों में ATF करीब ₹11.28 प्रति लीटर महंगा हो चुका है। किलोलीटर के हिसाब से दखें, तो करीब 11000 रुपये से ज्यादा कीमत बढ़ चुकी है।
कीमत से एयरलाइंस पर बढ़ेगा दबाव
किसी एयरलाइन के संचालन में ईंधन सबसे महत्वपूर्ण लागतों में से एक है। ATF महंगा होने का सीधा असर एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट पर पड़ता है। फ्यूल खर्च बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। हालांकि ATF की कीमत बढ़ने का यह मतलब नहीं है कि हर एयरलाइन तुरंत टिकट के दाम बढ़ा देगी। कंपनियां बढ़ी हुई लागत को कुछ समय तक अपने मार्जिन में समायोजित कर सकती हैं या फिर किराये, फ्यूल सरचार्ज और अन्य शुल्कों के जरिए उसका कुछ हिस्सा यात्रियों पर डाल सकती हैं। टिकट की कीमत मांग, रूट, सीट उपलब्धता और एयरलाइन की प्राइसिंग स्ट्रेटेजी जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है।
क्या महंगे हो जाएंगे फ्लाइट के टिकट?
ATF महंगा होने के बाद हवाई टिकटों की कीमत बढ़ने की संभावना जरूर बढ़ती है, लेकिन तुरंत टिकट में किसी तय प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। एयरलाइंस आमतौर पर टिकट की कीमत तय करते समय केवल ईंधन लागत नहीं देखतीं। विमान का संचालन, एयरपोर्ट शुल्क, मेंटेनेंस, क्रू लागत, लीजिंग खर्च, मुद्रा विनिमय दर और यात्रियों की मांग भी किराये को प्रभावित करते हैं। ऐसे में ATF की लगातार बढ़ती कीमत एयरलाइंस के लिए लागत का अतिरिक्त दबाव जरूर पैदा करती है। यदि यह बढ़ोतरी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर हवाई किरायों में दिखाई दे सकता है।
जुलाई में घटे थे जेट फ्यूल के दाम
मौजूदा तेजी से पहले ATF की कीमतों में कटौती भी हुई थी। जेट फ्यूल के दाम लगातार एक ही दिशा में नहीं बढ़े हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बदलाव के अनुसार घरेलू ATF की कीमतों में हर महीने संशोधन किया जाता है। इंडियन ऑयल के आधिकारिक आंकड़ों में ATF की कीमतों के पिछले मासिक बदलाव दर्ज किए जाते हैं। कंपनी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख केंद्रों के लिए घरेलू एयरलाइंस के ATF के रेट प्रकाशित करती है।
त्योहारी सीजन में बढ़ सकती है चिंता
सितंबर के बाद देश में त्योहारी और छुट्टियों का सीजन शुरू होता है। नवरात्रि, दिवाली, छठ पूजा और साल के अंत की छुट्टियों के दौरान कई रूट पर हवाई यात्रा की मांग बढ़ती है। अगर बढ़ी हुई मांग के साथ ATF की कीमत भी ऊंची रहती है, तो एयरलाइंस के लिए किराये पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ सकता है। खासकर पीक ट्रैवल डेट्स पर सीमित सीट उपलब्धता के कारण यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ सकता है।

