PM Modi’s BRICS Diplomacy: भारत की मेजबानी में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों के समूह ने शनिवार को सर्वसम्मति से एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया। इस घोषणापत्र में बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग की गई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ‘संरचनात्मक बदलाव’ भी शामिल है। साथ ही, इसमें आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई। इसमें ‘युद्ध की एकतरफा कार्रवाइयों’ की भी निंदा की गई और मध्य पूर्व में जारी सैन्य आक्रामकता के बीच समुद्री यात्रियों और कमर्शियल नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। घोषणापत्र में पहलगाम हमलों की भी निंदा की गई। नई दिल्ली में दो दिन की बैठक की मेजबानी कर रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन की शुरुआत के बाद यह घोषणा की।
ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र की 10 सबसे अहम बातें
- पहलगाम आतंकी हमले की निंदा: 22 अप्रैल 2025 के हमले की कड़ी निंदा, 26 लोगों की मौत का जिक्र।
- आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख: आतंकवाद के हर रूप और हर वजह की निंदा की गई।
- आतंकवाद को धर्म से न जोड़ें: आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का विरोध।
- सीमा पार आतंकवाद पर कार्रवाई: आतंकवाद, उसकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई पर जोर।
- आतंकियों की जवाबदेही तय हो: आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की बात।
- संयुक्त राष्ट्र की आतंकरोधी संधि जल्द बने: अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित संधि को जल्द अपनाने की मांग।
- ब्रिक्स के मूल सिद्धांत मजबूत होंगे: आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सहमति से फैसलों पर जोर।
- एकतरफा टैरिफ की निंदा: एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर चिंता जताई गई। कहा कि ऐसे कदम WTO के नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
- परमाणु खतरा: परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर चिंता जताई गई।
- भारत की अध्यक्षता की सराहना: BRICS देशों ने भारत की अध्यक्षता में हुए BRICS प्लस और आउटरीच संवाद की सराहना की।
समान भागीदारी पर जोर
घोषणापत्र में कहा गया कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार अमेरिकी डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में किया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने अपनी समापन टिप्पणी में कहा, ”आज की चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके संस्थानों के जरिए नहीं चलाया जा सकता। प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार जरूरी हैं। हमने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य की तकनीकों और उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों के विकास में ‘ग्लोबल साउथ’ की समान भागीदारी होनी चाहिए।”
साझा संकल्प के लिए स्पष्ट दिशा
उन्होंने आगे कहा, ”आज अपनाया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ हमारे साझा संकल्प के लिए एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है। अब इन संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलना हमारी जिम्मेदारी है।” प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत दुनिया भर के नेताओं का स्वागत किया। इस सम्मेलन में ब्रिक्स समूह के नेता एक साथ जुटे।
‘फैसले लेने वाला बने ग्लोबल साउथ’
इससे पहले, दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करते हुए शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ को फैसले लेने वाला बनना चाहिए और हर सदस्य देश की आवाज सुनी जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि UN सुरक्षा परिषद में सुधारों में अब और देरी नहीं की जा सकती।
प्रधानमंत्री ने कहा, ”ग्लोबल साउथ वैश्विक संगठनों में तो आगे की कतार में रहता है, लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में पीछे की कतार में ही रह जाता है। हमें ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के प्लेटफॉर्म’ में बदलना होगा। एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो, और हर कोशिश के केंद्र में मानवता की प्रगति हो।”
10-सूत्रीय रोडमैप पर दिया जोर
उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि इस क्षेत्रीय समूह के अगले समिट से पहले सुधारों के लिए 10-सूत्रीय रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इस रोडमैप में प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया, इन तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
सुरक्षा परिषद में सुधार तत्काल जरूरत
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ”प्रतिनिधित्व के मामले में मैं यह कहना चाहता हूं कि UN सुरक्षा परिषद में सुधारों में अब और देरी नहीं की जा सकती। इस मुद्दे पर, टेक्स्ट-आधारित बातचीत को एक निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट, ठोस नतीजों से जोड़ा जाना चाहिए।”
भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स समिट
भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। समिट शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहा है। सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात पर है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद संबंधों को धीरे-धीरे स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

