Zomato extra charge: फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर के लिए ग्राहकों से शुल्क ले रहा है। कंपनी कार्ट वैल्यू का 2% (अधिकतम ₹30 तक) ‘पे-ऑन-डिलीवरी’ फीस के तौर पर ले रही है। यह ‘पे-ऑन-डिलीवरी’ फीस उन ग्राहकों के लिए एक सुविधा शुल्क है जो अपने दरवाजे पर पेमेंट करना चुनते हैं।
कम से कम ₹5 का शुल्क
जोमैटो ने ‘कैश ऑन डिलीवरी’ चुनने वाले ग्राहकों से अतिरिक्त ₹5 वसूलना शुरू कर दिया है। यह फूड-डिलीवरी प्लेटफॉर्म द्वारा ग्राहकों से लिए जाने वाले कई तरह के शुल्कों में एक और शुल्क है। नया ‘पे ऑन डिलीवरी फी'(डिलीवरी पर भुगतान शुल्क) जोमैटो के बिल समरी में एक अलग आइटम के तौर पर दिखता है। ऐप लिस्टिंग से पता चलता है कि यह शुल्क उन ऑर्डर पर लगाया जा रहा है जिनमें ग्राहक खाना आने पर नकद भुगतान करना चुनते हैं। हालांकि, यह फीस अलग-अलग हो सकती है। यूजर्स से ₹5 से लेकर ₹30 तक चार्ज किया जा रहा है।
ऑनलाइन पेमेंट पर शुल्क नहीं
यह फीस जोमैटो की प्लेटफॉर्म फीस, रेस्टोरेंट पैकेजिंग चार्ज और GST से अलग है। जो कस्टमर डिलीवरी के समय कैश में पेमेंट चुनते हैं, उनसे यह अतिरिक्त रकम ली जाती है, जबकि ऑनलाइन पेमेंट करने वालों को यह फीस नहीं देनी पड़ती।

कॉम्पिटिशन का दबाव बढ़ा
यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब फूड-डिलीवरी के क्षेत्र में कॉम्पिटिशन तेजी से बढ़ रहा है। नई कंपनियां अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। रैपिडो (Rapido) की ‘Ownly’ सर्विस तेजी से आगे बढ़ रही है और फ्लिपकार्ट (Flipkart) अपनी ‘Eat In’ फूड-डिलीवरी सर्विस का ट्रायल कर रही है। स्विश (Swish) जैसे स्टार्टअप्स ने भी नई फंडिंग जुटाई है, जिससे जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) जैसी पहले से मौजूद कंपनियों पर कॉम्पिटिशन का दबाव और बढ़ गया है।
छोटा शुल्क, बड़ी कमाई
जोमैटो के लिए ऐसे चार्ज का महत्व किसी एक ऑर्डर पर मिलने वाली रकम से ज्यादा कंपनी के बड़े पैमाने (स्केल) में है। जोमैटो हर दिन लगभग 23-25 लाख फूड ऑर्डर प्रोसेस करता है। इस पैमाने पर हर ऑर्डर पर 5 रुपये का चार्ज लगाने से सैद्धांतिक रूप से हर दिन 1.15-1.25 करोड़ रुपये या सालाना लगभग 420-456 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

