अंबाला. अक्सर माता-पिता बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं. हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करे, उसकी बुद्धि तेज हो और वह भविष्य में अपने करियर में सफलता हासिल करें. कई बार तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता. ऐसे में कुछ अभिभावक ज्योतिष और धार्मिक उपायों का भी सहारा लेते हैं. इस बारे में अंबाला शहर के लाल किताब ज्योतिषाचार्य कुमार गौरव लोकल 18 से बताते हैं कि बच्चे के व्यक्तित्व और उनके विकास में घर के माहौल और माता-पिता के संस्कारों की भी महती भूमिका होती है. अगर बच्चे को बचपन से ही अच्छे संस्कार दिए जाएं और उसे धार्मिक व सकारात्मक वातावरण मिले तो उसके व्यक्तित्व पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ सकता है. कुमार गौरव के मुताबिक, ज्योतिष में बच्चे के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. कुछ मामलों में राहु, केतु, शनि या अन्य ग्रहों की महादशा अथवा प्रतिकूल प्रभाव होने की स्थिति में बच्चे के व्यवहार और पढ़ाई पर असर पड़ने की मान्यता है.
बुधवार ही क्यों
कुमार गौरव कहते हैं कि अगर किसी बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है तो ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए तांबे का सिक्का धारण कराया जा सकता है. तांबे के सिक्के को बुधवार के दिन गंगा जल में डुबोकर बच्चे के गले में पहनाया जाता है. इससे बुध और सूर्य से जुड़े सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होने की मान्यता है. बच्चों की एकाग्रता और बुद्धि के लिए भगवान गणेश की पूजा का भी उपाय है. बच्चे भगवान गणेश की मूर्ति के सामने बैठकर प्रार्थना कर सकते हैं. गन्ने का रस बिना नींबू और नमक के भगवान गणेश को अर्पित करने की भी धार्मिक मान्यता है. इसके बाद बच्चे को भगवान गणेश के सामने अपनी पढ़ाई और एकाग्रता के लिए प्रार्थना करनी चाहिए.
तुरंत काम करेगी ये ट्रिक
कुमार गौरव के अनुसार, बच्चों के लिए मां सरस्वती की पूजा भी की जा सकती है, क्योंकि उन्हें विद्या और ज्ञान की देवी माना जाता है. मां सरस्वती की पूजा के दौरान नीले फूल अर्पित करने का भी उपाय किया जा सकता है. इससे बच्चों को मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है और पढ़ाई के प्रति उनका रुझान बढ़ सकता है. हालांकि, बच्चों की पढ़ाई में रुचि केवल ज्योतिषीय उपायों पर निर्भर नहीं करती. पढ़ाई के लिए घर का सकारात्मक माहौल, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, माता-पिता का सहयोग और बच्चे की रुचि को समझना भी जरूरी है.