India Boosts Aviation Security: फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में फ्लाइट डेक पर हुई गंभीर घटना के बाद दुनिया भर में विमानन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। भारत में भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभावित सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। इसी बीच देश के एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। 8 एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने हैं और इनमें से कुछ जगहों पर मशीनें पहुंच भी चुकी हैं।
फ्लाईदुबई घटना के बाद सुरक्षा समीक्षा
फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 बुधवार को दुबई से तेल अवीव जा रही थी। उड़ान के दौरान फ्लाइट डेक में एक घटना हुई, जिसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक डायवर्ट किया गया और वहां सुरक्षित लैंडिंग हुई। फ्लाईदुबई ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा था कि चालक दल ने स्थिति को नियंत्रित किया था। संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल ने अब मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित करने का आदेश दिया है। भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से भी इस घटनाक्रम के संभावित सुरक्षा पहलुओं को देखा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर संबंधित सुरक्षा एजेंसियों और वरिष्ठ अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए सलाह दी जा सकती है।
फुल-बॉडी स्कैनर क्यों लगाए जा रहे हैं?
फुल-बॉडी स्कैनर का इस्तेमाल यात्री की सुरक्षा जांच के दौरान शरीर पर छिपी संदिग्ध वस्तुओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह तकनीक सामान्य मेटल डिटेक्टर की तुलना में अलग तरह से काम करती है और कपड़ों के नीचे छिपी कुछ वस्तुओं की पहचान करने में मदद कर सकती है। भारत सरकार पहले ही एयरपोर्ट सुरक्षा को आधुनिक बनाने के लिए फुल-बॉडी स्कैनर को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बता चुकी है। 2022 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि एयरपोर्ट्स पर बॉडी स्कैनर की स्थापना चरणबद्ध तरीके से की जा रही है।
8 एयरपोर्ट पर तैनाती की तैयारी
मंत्रालय की मौजूदा प्रक्रिया के तहत कुछ एयरपोर्ट्स पर फुल-बॉडी स्कैनर लगाए जाने की दिशा में काम चल रहा है। भारत ने फुल-बॉडी स्कैनर और अन्य आधुनिक एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों की टेस्टिंग के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। अप्रैल 2026 में ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) और राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (RRU) ने एक MoU पर हस्ताक्षर किया था। इसके तहत फुल बॉडी स्कैनर्स समेत अन्य सुरक्षा उपकरणों की टेस्टिंग, परफॉर्मेंस, इवैल्युएशन और सर्टिफिकेशन के लिए एक समर्पित स्वदेशी टेस्टिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा।
यात्रियों की प्राइवेसी का क्या होगा?
फुल-बॉडी स्कैनर को लेकर यात्रियों के बीच सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी की रहती है। मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि स्कैनर का उद्देश्य यात्री की पहचान या शरीर की वास्तविक तस्वीर प्रदर्शित करना नहीं है। इसके बजाय स्क्रीन पर शरीर का एक जेनेरिक रिप्रेजेंटेशन दिखाई जाता है और अगर किसी स्थान पर संदिग्ध वस्तु का पता चलता है तो उसकी स्थिति को हाइलाइट किया जाता है। इससे सुरक्षा जांच के दौरान यात्री की व्यक्तिगत पहचान को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। भारतीय यात्रियों के सामान्य पहनावे और उनसे जुड़ी वस्तुओं को भी स्कैनिंग सिस्टम के एल्गोरिदम में शामिल करने पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सामान्य वस्तुओं के कारण होने वाले फाल्स अलार्म्स को कम करना है।

