रेवाड़ी. साल 1999 की बात है. लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की तलाश चल रही थी. उस दौरान पीएम मोदी के पास हरियाणा का प्रभार था और ऐसे में उन्होंने भाजपा नेता ओपी धनखड़ से कहा था कि वह कोई शहीद की वीरांगना को खोजे, जो कि चुनाव लड़ने की इच्छुक हो. फिर सामने आया सुधा यादव का नाम. वही सुधा यादव, जो कि अब कर्नाटक की नई राज्यपाल बनी हैं.
दरअसल, हरियाणा की भाजपा की वरिष्ठ नेता डॉ. सुधा यादव को अब नई जिम्मेदारी दी गई है. कभी महेंद्रगढ़ (अब गुरुग्राम) से लोकसभा सांसद रह चुकीं सुधा यादव पीएम मोदी की भरोसेमंद नेताओं में हैं.
डॉ. सुधा यादव के पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल में डिप्टी कमांडेंट थे और 26 मई 1999 को कारगिल युद्ध में उनकी शहादत हुई थी. उस समय सुधा यादव हरियाणा शिक्षा विभाग में लेक्चरर थीं. दो बच्चों की मां सुधा ने 1987 में रसायन विज्ञान में एमएसई की पढ़ाई की थी.
वर्ष 1999 में जब मोदी हरियाणा भाजपा के प्रभारी थे, तब उन्होंने सुधा यादव को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया. इस दौरान भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए सुधा यादव ने राव इंद्रजीत सिंह को करीब 1.39 लाख वोटों से हराया था. मोदी सरकार में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह उस समय कांग्रेस में थे.
हरियाणा से दूसरी महिला बनीं राज्यपाल
सुधा यादव ने 1999 से 2004 तक 13वीं लोकसभा में महेंद्रगढ़ का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि, इसके बाद वह कभी चुनाव नहीं जीत पाईं. 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें गुरुग्राम से उतारा गया था. हालांकि, पीएम से नजदीकी संबंध होने के वजह से उन्हें संगठन में जगह मिलती रही और साल 2015 में भाजपा ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया. इसके बाद 2019 से 2022 तक वह राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य रहीं और फिर 17 अगस्त 2022 को भाजपा ने उन्हें संसदीय बोर्ड में शामिल किया. गौर रहे कि हरियाणा से सुषमा स्वराज के बाद वह राज्यपाल बनने वाली दूसरी महिला हैं.