Uttarakhand Madrasa Row: उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त और मान्यता के लिए आवेदन कर चुके 206 मदरसों में अब शुक्रवार की जगह रविवार को साप्ताहिक छुट्टी रहेगी। इन संस्थानों में सोमवार से शनिवार तक पढ़ाई होगी। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। फैसले के सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता, धार्मिक परंपराओं और सरकार की नीति को लेकर बहस शुरू हो गई है।
206 मदरसों में लागू होगी नई व्यवस्था
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर नई व्यवस्था लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। यह बदलाव उन 206 मदरसों पर लागू होगा, जो शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त कर चुके हैं या मान्यता के लिए आवेदन कर चुके हैं। प्राधिकरण का कहना है कि जो मदरसे स्कूल के रूप में मान्यता लेते हैं, उन्हें शिक्षा विभाग के निर्धारित नियमों और शैक्षणिक कैलेंडर का पालन करना होगा। इसी आधार पर इन संस्थानों में भी दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों की तरह रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने की व्यवस्था की जा रही है।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि कुछ मदरसे मान्यता लेने के बाद भी शुक्रवार को छुट्टी रख रहे थे। इस व्यवस्था को बदलने के लिए शिक्षा महानिदेशक को पत्र लिखा गया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत ने भी कहा कि स्कूल की मान्यता लेने वाले मदरसों को सरकारी विद्यालयों पर लागू नियमों का पालन करना होगा।
अब सोमवार से शनिवार तक होगी पढ़ाई
अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव पराग धकाते ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में बताया कि मदरसों का संचालन भी शिक्षा विभाग के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार किया जाएगा। इसके तहत सोमवार से शनिवार तक पढ़ाई होगी और रविवार को साप्ताहिक छुट्टी रहेगी। इस बदलाव का उद्देश्य मदरसों की पढ़ाई को सामान्य विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था के अनुरूप लाना बताया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य विषयों की पढ़ाई भी कराई जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा और रोजगार के अवसरों में मदद मिल सके।
सरकार के फैसले पर उठ रहे हैं सवाल
शुक्रवार की छुट्टी समाप्त करने के फैसले पर विरोध भी सामने आया है। कांग्रेस और कुछ इस्लामिक मामलों के जानकारों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। विरोध करने वालों का तर्क है कि मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में पहले ही बड़े बदलाव किए जा रहे हैं और साप्ताहिक छुट्टी के दिन को बदलने की जरूरत पर चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। इस मुद्दे पर बहस का मुख्य केंद्र यही है कि शैक्षणिक व्यवस्था में समान नियम लागू करने और संस्थानों की पारंपरिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

