Share Market News Today: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर नजर आई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 642.51 अंक टूटकर 73,067.18 के स्तर पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 241.35 अंक गिरकर 22,570.90 पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट से बाजार में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। बाजार की इस कमजोरी के पीछे महंगे कच्चे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर दबाव डाला।
सेंसेक्स 642 अंक लुढ़का, निवेशकों को लगा झटका
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई। सूचकांक 642 अंक टूटकर 73,067 पर आ गया। बाजार में इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि इससे पहले बुधवार को भी सेंसेक्स नुकसान के साथ बंद हुआ था। बाजार विशेषज्ञों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कारोबार आगे बढ़ने के साथ सेंसेक्स अपनी शुरुआती गिरावट से उबर पाता है या नहीं। वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।
निफ्टी 241 अंक गिरा, 22600 के स्तर से नीचे पहुंचा
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी गुरुवार को दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में यह 241 अंक गिरकर 22,570 पर पहुंच गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी 22,600 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आगे की दिशा तय करने में बिकवाली की व्यापकता, प्रमुख कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय संकेत अहम भूमिका निभा सकते हैं।
बुधवार को भी गिरावट के साथ बंद हुआ था बाजार
इससे पहले बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी। बीएसई सेंसेक्स 143 अंक यानी 0.19 प्रतिशत टूटकर 73,709 पर बंद हुआ था। वहीं, एनएसई निफ्टी 77.60 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 22,811.35 के स्तर पर आ गया था। बुधवार को बाजार ने शुरुआती बढ़त गंवा दी थी और कारोबार के अंत में बिकवाली हावी रही। ऐसे में गुरुवार को कमजोर शुरुआत ने निवेशकों की सतर्कता और बढ़ा दी।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ी चिंता
भारतीय शेयर बाजार पर दबाव की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया, जिससे भारत में आयातित महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चा तेल महंगा होने पर ईंधन, परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क किया है। महंगे तेल का असर तेल विपणन कंपनियों, पेंट, टायर और अन्य कच्चे माल पर निर्भर उद्योगों के मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक बाजार में जोखिम लेने से बच सकते हैं।

