Mddle East War, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल के ईरान पर जंग को 33 दिन बीत गए हैं और अमेरिकी राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान में नुकसान के भले बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन असलियत पर गौर करें तो फिलहाल ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 28 फरवरी को पहली बार हमला किया था जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए हैं। इससे भड़का ईरान लगातार पश्चिम एशिया (middle east) में स्थित अमेरिका और इजरायल के ठिकानों को निशाना बना रहा है।
ट्रम्प कई बार कर चुके हैं ईरान के कमजोर पड़ने की बात
इस बीच ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि यूएस-इजरायल की सैन्य कार्रवाई में ईरान, इतना कमजोर पड़ गया है कि वह जंग जारी रखने की स्थिति में नहीं है। नेतन्याहू ने हाल ही में कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान आधे से ज्यादा लक्ष्य हासिल कर चुका है, लेकिन इसकी समयसीमा तय नहीं है। पर ईरान के निरंतर इजरायल व यूएस पर पलटवार से लगता नहीं कि वह जंग से अभी पीछे हटे।
खर्ग द्वीप व ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की चेतावनी
ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी भी दी थी कि यदि ईरान पीछे नहीं हटा तो अमेरिकी सेना खर्ग द्वीप समेत उसके अहम ऊर्जा ठिकानों पर हमला कर सकती है। इसके अलावा ट्रंप ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेन के लिए उस पर जमीनी कार्रवाई की धमकी भी दे चुके हैं। इसके लिए वह मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी में हैं। कुछ सैनिक भेजे भी जा चुके हैं। लेकिन लगता है ट्रंप की इन सब धमकियों का ईरान को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वह लगातार हमले कर रहा है। मंगलवार सुबह भी उसकी ओर से मिसाइलें दागी गईं।
ईरान के साथ सार्थक बातचीत की भी बात कर रहे ट्रंप
ईरान में अमेरिकी ट्रूप्स की तैनाती को लेकर आ रही खबरों के बीच ईरान के उप-राष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरिफ ने कहा है कि ये ट्रंप के लिए खुदकुशी जैसा होगा। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि कोई भी नरक से वापस घर नहीं जाता। ईरान के समथर्क देश भी अमेरिका व इजरायल को निशाना बना रहे हैं। लेबनान में एक समूह ने ड्रोन और मिसाइल हमले कर इजराइल के टैंक को निशाना बनाने का दावा किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी से अमेरिकी सेना हटाने की मांग की है। हमलों के बीच ट्रंप यह भी कह रहे हैं कि ईरान के साथ सार्थक बातचीत भी जारी है।
इजरायली पीएम नेतन्याहू का सुझाव
इजरायली पीएम नेतन्याहू ने इस बीच दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित रखने के मकसद से एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के पास है और इस कारण ईरान जब चाहे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को खतरे में डाल सकता है। इजरायली पीएम ने कहा कि सैन्य समाधान सिर्फ कुछ समय के लिए स्थिरता दे सकता है, इसलिए होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा पाइपलाइनों का रास्ता बदलना चाहिए। यदि ऐसा कर दिया जाए तो ईरान की रणनीतिक ताकत कम हो जाएगी।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक
नेतन्याहू का मानना है कि जमीन के रास्ते नए पाइपलाइन नेटवर्क बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर ईरान का दबदबा खत्म होगा। इन पाइपलाइनों को सऊदी अरब के रास्ते लाल सागर और भूमध्य सागर की तरफ ले जाना एक स्थायी समाधान हो सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात इसी रास्ते से होता है। इसके एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देश स्थित हैं। इस बीच अमेरिका ने ईरान के इस्फहान में स्थित हथियार डिपो पर 2000 किलो के बंकर बस्टर बम से हमला किया है।
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