ट्रेड डील के बाद आयातित कारों पर शुल्क 70 प्रतिशत हो सकता है कम, आॅटो सेक्टर में आएगा फिर से बूम
India-EU Trade Deal (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) एफटीए के नजदीक हैं। जानकारों का मानना है कि कल यानि 27 जनवरी को दोनों पक्षों के बीच एफटीए पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस समझौते पर भारत और ईयू के देशों के देशों की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजर है। इसीलिए इसे मरद आॅफ डील का नाम दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ इस एफटीए से भारत के आॅटो सेक्टर को विशेष उम्मीद है।
मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत आयातित कारों पर शुल्क में बड़ी कटौती की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ से आने वाली कारों पर शुल्क 110 प्रतिशत तक से घटाकर 40 प्रतिशत किया जा सकता है। यह कटौती अब तक भारतीय आॅटोमोबाइल बाजार को खोलने की सबसे बड़ी पहल मानी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि यह कम शुल्क उन सीमित कारों पर लागू होगा, जिनकी आयात कीमत 15,000 यूरो से अधिक है। आगे चलकर इस शुल्क को चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत तक लाने का भी प्रावधान हो सकता है।
भारत यूरोपीय संघ के देशों को ज्यादा निर्यात करता है
भारत का फायदा: अच्छी बात यह है कि भारत ने इसमें 76 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि आयात 60 अरब डॉलर रहा। वैश्विक संकेत यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की आर्थिक और सुरक्षा नीतियों के कारण वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। ऐसे में दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र-भारत और यूरोपीय संघ-आपसी विश्वास और साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने हवाई अड्डे पर उसुर्ला वॉन डेर लेन का स्वागत किया, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने इसे रणनीतिक साझेदारी का ‘अगला चरण’ बताया।
इन कंपनियों के वाहन होंगे सस्ते
कम शुल्क का सबसे ज्यादा लाभ फॉक्सवैगन, रेनो, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय कंपनियों को मिलने की उम्मीद है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वातार्ओं के मंगलवार को संपन्न होने की घोषणा होने की संभावना है। इसके बाद समझौते के विस्तृत प्रावधानों को अंतिम रूप देकर दोनों पक्षों की मंजूरी ली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से अटके इस समझौते के पूरा होने की घोषणा इस बैठक में की जा सकती है। ज्ञात रहे कि यूरोपीय संघ एक ब्लॉक के रूप में भारत का सबसे बड़ा ‘गुड्स ट्रेडिंग पार्टनर’ (सामान का व्यापार करने वाला साझेदार) है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईयू के बीच कुल 136 अरब डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये) का व्यापार हुआ।

