हरियाणा में शिक्षा, पुलिस और अन्य प्रमुख विभागों में लंबे समय से अटकी भर्तियों को लेकर अब बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में भर्ती प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए स्पेशल एजेंसी गठित करने की दिशा में रास्ता खुलता नजर आ रहा है। हरियाणा के रेशनलाइजेशन कमीशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सौंपी अपनी रिपोर्ट में प्रमुख विभागों में हो रही भर्तियों की देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए अलग भर्ती एजेंसी बनाने की सिफारिश की है।
कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में भर्ती प्रक्रियाएं अक्सर देरी का शिकार होती हैं और कई मामलों में लंबी मुकदमेबाजी के कारण नियुक्तियां समय पर नहीं हो पातीं। इसका सीधा असर विभागों के कामकाज पर पड़ता है और जरूरी पद लंबे समय तक खाली रहते हैं। इसी समस्या को देखते हुए कमीशन ने विशेष भर्ती एजेंसी के गठन को समय की जरूरत बताया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भर्तियों में देरी के कारण विभागों को मजबूरी में संविदा आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ती है। इससे न केवल प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ती हैं, बल्कि कानूनी विवाद भी खड़े हो जाते हैं। अस्थायी व्यवस्था के चलते विभागों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ता है।
रेशनलाइजेशन कमीशन ने हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन (HPSC) और हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की है। रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न विभाग समय-समय पर रिक्त पदों के लिए सिफारिशें इन आयोगों को भेजते हैं, लेकिन वहां से चयन और अनुशंसा आने में काफी समय लग जाता है। इसी देरी के चलते कई विभागों में मानव संसाधन संकट बना रहता है।
कमीशन ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि HPSC और HSSC की क्षमता में वृद्धि की जाए, ताकि बढ़ती भर्ती आवश्यकताओं को समय पर पूरा किया जा सके। इसके साथ ही रिपोर्ट में 20 सरकारी विभागों के पुनर्गठन की सिफारिश भी की गई है। इन विभागों में ग्रुप बी और सी के कर्मचारियों को पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित न होने और कार्यकुशलता की कमी का हवाला दिया गया है, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
कमीशन की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर खाली पदों पर समयबद्ध तरीके से भर्तियां होती रहें, तो प्रशासनिक स्तर पर कई समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा। फिलहाल 20 विभागों को लेकर सुझाव दिए जा चुके हैं, जबकि 23 अन्य विभागों के सुधार का काम अभी जारी है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा सरकार के अगले फैसले पर टिकी है, जिससे राज्य की भर्ती प्रणाली में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।


