
लोकपाल की ओर से चार्जशीट फाइल करने की मंजूरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया रद्द
Mahua Moitra Cash For Query Case, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ फिलहाल सीबीआई चार्जशीट दाखिल नहीं करेगी। इस मामले में शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल की ओर से चार्जशीट फाइल करने की मंजूरी को रद्द कर दिया है। मामला पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने का है। सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के वकील ने दलील दी कि लोकपाल ने मंजूरी देते समय कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया।
कानून के मुताबिक किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ मंजूरी देने से पहले उनकी टिप्पणी लेना जरूरी होता है, जो नहीं ली गई। गौरतलब है कि 2019 में सांसद बनने के बाद से महुआ मोइत्रा ने पार्लियामेंट में 28 केंद्रीय मंत्रालयों से जुड़े 62 सवाल पूछे हैं। इनमें पेट्रोलियम से लेकर कृषि, शिपिंग, नागरिक उड्डयन, रेलवे आदि शामिल हैं। कुल 62 में से 9 सवाल अडाणी समूह से संबंधित थे।
बेंच ने कहा- लोकपाल ने इस मामले में गलती की
जस्टिस अनिल क्षतरपाल और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कहा कि हमारा मानना है कि लोकपाल ने इस मामले में गलती की है। कोर्ट ने लोकपाल से कहा है कि वह लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20 के तहत एक महीने के भीतर कानून के अनुसार दोबारा फैसला करे।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उठाया था मामला
यह मामला अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ था। जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने मोइत्रा पर महंगे गिफ्ट्स और पैसे लेने के बदले में कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के इशारे पर अडाणी ग्रुप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए लोकसभा में सवाल पूछने का आरोप लगाया था। महुआ पर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का भी आरोप लगा था। इसके बाद यह मामला लोकसभा की एथिक्स कमेटी में भेज दिया गया था, जहां पर महुआ दोषी पाई गई थीं। इसके बाद महुआ को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था।
एथिक्स कमेटी के समक्ष दोषी पाई गई मोइत्रा
लोकसभा की एथिक्स कमेटी में महुआ के दोषी पाए जाने के बाद मामला लोकपाल के पास पहुंचा। लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत सांसद लोकपाल के दायरे में आते हैं। यदि आरोप रिश्वत, लाभ,या अनुचित प्रभाव से जुड़े हों तो लोकपाल जांच कर सकता है।
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