UPI MDR charge: केंद्र सरकार ने मंगलवार को व्यापारियों को बड़ी राहत दी। फेस्टिव सीजन को देखते हुए UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली तक के लिए टाल दिया गया है। एनपीसीआई (NPCI) ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी है।
व्यापारियों की थी टालने की मांग
दरअसल, यह शुल्क 15 अक्तूबर से लागू होने वाला था। व्यापारी लगातार इस फैसले को टालने की मांग कर रहे थे।पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शंस पर 0.4% MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन जैसे-जैसे इसकी डेडलाइन नजदीक आ रही थी, बाजार में कई बड़ी व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही थीं। चलिए, उन वजहों पर नजर डालते हैं जिसकी वजह से सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है।
फेस्टिव सीजन का असर
यह फेस्टिव सीजन का समय चल रहा है। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान देश में सबसे ज्यादा खुदरा कारोबार होता है। ऐसे में अगर MDR लागू कर दिया जाता तो इससे व्यापारियों पर लागत का बोझ बढ़ जाता। इसका असर ग्राहकों पर फेस्टिव सीजन में महंगाई के तौर पर पड़ता।
UPI MDR on Select Merchant Transactions Shall be Implemented Post Diwali
Press Release Link: https://t.co/5KMjOP0tHd https://t.co/pD8IKfN6sR
— NPCI (@NPCI_NPCI) October 13, 2026
कार्ड को लेकर तकनीकी भ्रम
कार्ड्स के मुकाबले UPI का ढांचा काफी अलग है। इसमें यूटिलिटी बिल, लोन रीपेमेंट और कैपिटल मार्केट जैसे ट्रांजैक्शंस के लिए अलग-अलग नियम तय किए गए हैं, जिन्हें लेकर पेमेंट कंपनियों और मर्चेंट्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
कैपिटल मार्केट, लोन रीपेमेंट का झोल
ब्रोकिंग और कैपिटल मार्केट एसोसिएशन ने भी सेबी के सामने यह बात रखी थी कि ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे डालना पर्सन-टू-पर्सन (P2P) जैसा ही है, जिस पर अतिरिक्त MDR लादना सही नहीं है। इन सभी तकनीकी और सिस्टम अपग्रेड से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए उद्योग जगत ने इसे आगे बढ़ाने की मांग की थी।
₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर MDR की व्यवस्था
केंद्र सरकार ने ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट्स पर मर्चेंट के लिए 0.4% का शुल्क लगाने की घोषणा की थी। मतलब अगर कोई ग्राहक किसी दुकान से ₹2,000 से ज्यादा का सामान खरीदता है तो उसपर चार्ज लागू होता, लेकिन ये चार्ज ग्राहक को नहीं बल्कि दुकानदार यानी मर्चेंट को ही देना था।

