
चंपत राय की जगह नए ट्रस्टी रिटायर्ड आईएफएस कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है
Ram Mandir Chadhawa Chori Case, (द भारत ख़बर), अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बैठक में ट्रस्टी के. पाराशरन ने कहा था कि त्यागपत्र देते ही इसे स्वीकार करना ट्रस्ट के संविधान में हैं। इसलिए इस्तीफा स्वीकार किया गया। 22 जुलाई को ट्रस्ट की फिर बैठक होगी।
चंपत राय बोले- जो हुआ वह कष्टदायी
चंपत राय ने कहा है कि जब तक अपराधी पकड़े नहीं जाते तब तक पद पर रहना सही नहीं है। जो हुआ वह कष्टदायी है। इससे हम सब दुखी हैं। चढ़ावा चोरी लज्जाजनक घटना है। कृष्ण मोहन ने कहा, चढ़ावा चोरी के आरोपियों को सजा दिलाएंगे। प्रबंधन की कमियों का फायदा उठाया गया, कमियों को दूर करेंगे ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो। समाज में अविश्वास है। विश्वास को दोबारा स्थापित करेंगे।
सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहले से लंबित है। लखनऊ के वकील मोहित अशोक ने 12 जून को याचिका दाखिल कर सीबीआई से जांच की मांग की थी।
वहीं, अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने पहली बार बयान दिया है। उन्होंने सोमवार को लेटर जारी कर कहा, चोरी से मैं आहत हूं। जिसने भी यह पाप किया है, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
मुझे पीएम मोदी पर भरोसा, जो भी इस पाप से जुड़ा है, उसे कड़ी सजा दिलाएंगे
उन्होंने कहा, मुझे पीएम मोदी और सीएम योगी पर भरोसा है कि जो भी इस पाप से जुड़ा है, उसे कड़ी सजा दिलाएंगे। यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न है। कोई भी व्यक्ति अपने निजी लाभ के लिए राजनीति न करे।
दान में हाथ डालने वालों को सात जन्मों तक इसका फल भोगना पड़ेगा
फर्रुखाबाद में दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत ईश्वर दास महाराज ने कहा- भगवान के दान में हाथ डालने वालों को सात जन्मों तक इसका फल भोगना पड़ेगा। चोरी की घटनाओं के लिए केवल वर्तमान सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि ऐसी घटनाएं पूर्ववर्ती सरकारों के समय भी हुई हैं। मठ-मंदिरों में सरकारी दखल ठीक नहीं है। जिन मठ-मंदिरों का संचालन संत करते हैं, वहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन और अन्य व्यवस्थाएं बेहतर रहती हैं।
ये भी पढ़ें: बांकीपुर से विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर
